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Exclusive : अपने ही सेवादार से बात करने पर क्यों तनाव में आ जाते थे भय्यू महाराज

bhaiyyu maharaj

इंदौर। पुलिस ने भय्यू महाराज आत्महत्या केस में रविवार को फिर 4 लोगों से पूछताछ की। इसमें वह प्रमुख संदेही सेवादार अमोल चव्हाण भी शामिल था, जिससे बात करते वक्त भय्यू महाराज तनाव में आ जाते थे। उसने इतना ही बताया कि महाराज कुहू को इंदौर आने से रोकना चाहते थे। फोन पर वे उससे विदेश भेजने व कोचिंग के सिलसिले में बात कर रहे थे।

सीएसपी मनोज रत्नाकर के मुताबिक सबसे पहले संजय यादव (57) से पूछताछ की गई। उन्होंने कहा वे करीब 20 साल पूर्व महाराज के संपर्क में आए। लगातार आश्रम आने के दौरान महाराज ने लाइजनिंग, प्रोग्राम और आश्रम में होने वाले कार्यक्रम का जिम्मा सौंपना शुरू किया। वह सेंधवा, देवास, खरगोन, शाजापुर जिले में हो रहे तालाब गहरीकरण का कामकाज भी देखता था। 10 जून को भी इसी संदर्भ में महाराज से चर्चा हुई थी। उस वक्त उन्होंने कहा था कि 60 तालाबों का गहरीकरण हो चुका है।

कुहू को समझाएं, वह इंदौर न आए

अमोल के मुताबिक वर्ष 2001 में गणेश कलश क्रीड़ा कार्यक्रम के दौरान पहली बार महाराज से मुलाकात हुई थी। उनका व्यक्तित्व देखकर दर्शन करने जाने लगा। 2004-05 में महाराज ने उसे प्रोजेक्ट तैयार करने, हेल्थ चेकअप के कार्यक्रम, स्कूल खोलने आदि का जिम्मा सौंपना शुरू किया। उनसे ज्यादातर इसी संबंध में बातें होती थीं।

सोमवार (11 जून) को महाराज पुणे आ रहे थे। रास्ते में उनसे कई बार बातचीत हुई। हर बार कुहू के बारे में चर्चा की। कुहू पुणे के वेस्टर्न एकेडमी में पढ़ रही थी। उसे लंदन भेजने के बारे में बात की थी। वे लंदन में ठहरने, कोचिंग, एडमिशन, टीसी, फीस आदि के बारे में बात कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि कुहू को समझाएं कि वह मंगलवार (12 जून) को इंदौर नहीं आए। पहले वह टीसी इशु करवाए। महाराज भी पुणे आ रहे थे, लेकिन कुहू ने इंदौर आने की जिद पकड़ ली तो वे इंदौर लौट आए।

वकील और सेवादार से भी पूछताछ

सेवादार अनिल परदेशी (पुणे) ने पूछताछ में बताया कि वह महाराज से 12 साल से जुड़ा था। वह सुखलिया में किराए से मकान लेकर रहता था। परदेशी आश्रम का कामकाज संभालता था। सीएसपी के मुताबिक पलासिया निवासी वकील राजा बड़जात्या से भी पूछताछ की गई है। उन्होंने भी सामान्य जानकारी दी है।

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