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E20 Fuel: E20 फ्यूल विवाद खत्म! सुप्रीम कोर्ट ने कहा-नीति पर हस्तक्षेप नहीं होगा

E20 Fuel: पुराने वाहनों में दिक्कत का दावा, फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने E20 को बताया सही

E20 Fuel: पुराने वाहनों में दिक्कत का दावा, फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने E20 को बताया सही

E20 Fuel: E20 फ्यूल विवाद खत्म! सुप्रीम कोर्ट ने कहा-नीति पर हस्तक्षेप नहीं होगा।भारत में E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल मिश्रित) को लेकर विवाद गहरा गया है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. हालांक कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया. याचिका में वाहनों के माइलेज में कमी और ईंधन की कीमतों को लेकर शिकायतें की गईं थीं. सरकार का दावा है कि इससे प्रदूषण कम होगा और किसानों को लाभ मिलेगा. इस खबर में हम इस विवाद और उसके पीछे के सभी कारण के साथ ही E20 फ्यूल के बारे में समझते हैं।E20 Fuel: E20 फ्यूल विवाद खत्म! सुप्रीम कोर्ट ने कहा-नीति पर हस्तक्षेप नहीं होगा

 

सुप्रीम कोर्ट में आज सोमवार (01 सितंबर) को E20 पेट्रोल पर सुनवाई हुई. इस सुनवाई के पीछे एक विवाद है. भारत ने E20 फ्यूल मतलब 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लागू करना शुरू कर दिया है. इसी के बाद से विवाद छिड़ा हुआ है. देश में E20 फ्यूल को लेकर लोग दो धड़ों में बंटे हुए हैं कोई इसे सही तो कोई इसे गलत बता रहा है. केंद्र सरकार की E20 पेट्रोल नीति को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

याचिकाकर्ता की तरफ से कहा कि गया कि कई कार और बाइक मालिकों ने शिकायत की है कि इस फ्यूल के इस्तेमाल करने से उनके वाहनों का माइलेज काफी कम हुआ है. ऐसे में आइये जानते हैं कि E20 फ्यूल क्या है और इसको लेकर क्या नुकसान बताए जा रहे हैं।

भारत ने साल 2023 से E20 फ्यूल को लागू करना शुरू कर दिया है, लेकिन इस पर विवाद छिड़ा हुआ है. इस फ्यूल को लागू करने के पीछे की वजह तेल आयात में कटौती है. इसके साथ ही कार्बन उत्सर्जन कम करना और गन्ना किसानों को समर्थन देना है, जो इस मिश्रण के लिए इथेनॉल उपलब्ध करा रहे हैं।

सरकार 2023 से धीरे-धीरे E20 ईंधन लागू कर रही है. हालांकि, अब इन्हें भारत के लगभग सभी 90,000 ईंधन स्टेशनों से पूरी तरह हटा दिया गया है.

याचिका में क्या की गई मांग?
चीफ जस्टिस बीआर गवई की अगुवाई वाली बेंच, जिसमें जस्टिस के विनोद चंद्रन और एनवी अंजारिया भी शामिल हैं, इस मामले की सुनवाई की. इसमें मांग की गई है कि हर फिलिंग स्टेशन पर E0 पेट्रोल (बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल) का विकल्प दिया जाए।

इसके साथ ही याचिका में मांग की गई है कि उपभोक्ताओं को यह भी जानने का पूरा अधिकार है कि वे अपने वाहन में किस तरह का फ्यूल इस्तेमाल कर रहे हैं. बिना जानकारी के E20 पेट्रोल बेचना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत सूचित विकल्प के अधिकार का उल्लंघन करता है।

याचिका दायर करने वाले का कहना था कि ईंधन में एथनॉल की मिलावट उपभोक्ता के लिए सस्ती होनी चाहिए. याचिका में कहा गया है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ में इथेनॉल मुक्त पेट्रोल अभी भी उपलब्ध है और मिश्रित ईंधन पेट्रोल स्टेशनों पर स्पष्ट लेबल के साथ आते हैं ताकि उपभोक्ता सूचित विकल्प चुन सकें।

क्या होता E20 फ्यूल ?

देश के सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल का प्लान देश को बताया था. उन्होंने इसको लेकर कहा था कि इसके इस्तेमाल से नॉर्मल फ्यूल पर हमारी निर्भरता कम होगी. इसके साथ ही प्रदूषण से राहत और किसानों को इसका लाभ मिलेगा.

E20 फ्यूल का मतलब साफ है कि इसमें 20% इथेनॉल + 80% पेट्रोल होता है. सरकार की तरफ से अप्रैल 2023 में इसे लॉन्च किया था. इसके पीछे की वजह प्रदूषण कम करना और देश को तेल आयात पर कम निर्भर करना था. इथेनॉल को वैज्ञानिक भाषा में इसे C2H5OH कहा जाता है, जिसे शुगर को फर्मेंटिग करके बनाया जाता है.

क्या है विवाद के पीछे की वजह?

E20 फ्यूल केवल उन्हीं कारों या फिर बाइक के लिए सही बताया गया है, जिनकी मैन्युफैक्चरिंग साल 2023 के बाद की है. अगर इससे पहले बने हुए वाहन इस फ्यूल का इस्तेमाल करते हैं तो इंजन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे इंजन में खटखट, जंग, कम माइलेज, रबर की नली और प्लास्टिक पाइप के खराब होने की समस्या आम हो जाती है. यही कारण है कि वाहन मालिक वारंटी संबंधी समस्याओं और बढ़ी हुई लागत से परेशान हैं.

E20 फ्यूल का इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों की तरफ से शिकायत की गई हैं. उन्होंने बताया कि इस फ्यूल के इस्तेमाल के बाद उनकी कार या बाइक का माइलेज 10 प्रतिशत तक कम हुआ है. उन्हें पहले के मुकाबले अब ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है जबकि इथेनॉल सस्ता है।

क्या E20 फ्यूल सस्ता है?

इथेनॉल जब से देश में आया है, तभी से इसको लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. पेट्रोल के मुकाबले इथेनॉल सस्ता है. इससे पेट्रोल में मिलाने के बाद कीमत कम होनी चाहिए थी. हालांकि ऐसा नहीं है. इथेनॉल मिक्स होने के बाद भी पेट्रोल उसी कीमत पर मिल रहा है, जो बाजार की कीमत है. यही कारण है कि इसका इस्तेमाल करने वालों का कहना है कि E20 फ्यूल के आने से उनका खर्चा कम होने के बजाय बढ़ गया है.

E20 फ्यूल से नुकसान के दावे कितने सही?

E20 फ्यूल के इस्तेमाल के बाद लगातार शिकायतें मिल रही हैं. शिकायतों से कई हद तक इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स भी सहमत है. उनके अनुसार E20 माइलेज कम करता है, लेकिन यह सुरक्षा के लिए कोई खतरा नहीं है. सियाम के कार्यकारी निदेशक पीके बनर्जी ने कहा , “लाखों वाहन पिछले कुछ समय से E20 पर चल रहे हैं. एक भी वाहन के ब्रेकडाउन या खराब होने की सूचना नहीं मिली है.”

बनर्जी ने कहा कि माइलेज में 50% की गिरावट के दावे निराधार और गलत जानकारी पर आधारित हैं. नियंत्रित वातावरण में किए गए वैज्ञानिक अध्ययनों में 2-4% की कमी देखी गई है, लेकिन वास्तविक परिस्थितियों में वाहन चलाने से ईंधन दक्षता में और भी ज्यादा गिरावट आएगी।

मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के कार्यकारी समिति के सदस्य सी.वी. रमन ने बताया, “सड़क पर, यह बहुत अलग हो सकता है, क्योंकि वाहनों का रखरखाव और संचालन जिस प्रकार किया जाता है, उसमें अंतर होगा. ”

E20 से पर्यावरण पर क्या होता है असर

इथेनॉल फ्यूल कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम कर सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे एल्डिहाइड जैसे कुछ उत्सर्जन बढ़ जाते हैं. इसके अलावा, इथेनॉल के लिए बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती भारत में पानी की कमी की समस्या को और बदतर बना रही है. तेल का भंडारण करने वालों को E20 ईंधन के लिए विशेष भंडारण का निर्माण करना पड़ता है, जो कुल मिलाकर एक अतिरिक्त लागत है. यही कारण है कि इसका कोई खास असर पर्यावरण पर होता दिखाई नहीं दे रहा है. बल्कि इससे पर्यावरण को और ज्यादा नुकसान हो रहा है.

भारत में इथेनॉल का उत्पादन कितना?

E20 फ्यूल को पूरा करने के लिए भारत को हर साल 1,000 करोड़ लीटर से ज़्यादा इथेनॉल की ज़रूरत है, हालांकि अभी भारत इतना उत्पादन नहीं कर पा रहा है. ET की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के बीच तक भारत की वार्षिक इथेनॉल उत्पादन क्षमता 1,810 करोड़ लीटर हो जाएगी.

किस तरीके का पेट्रोल मिलता है आपको

भारत में पहले पेट्रोल रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) 88 के साथ बेचा जाता था. आज, भारत में सामान्य पेट्रोल का RON 91 है ताकि BS-VI मानकों को पूरा किया जा सके, जिसका उद्देश्य हानिकारक उत्सर्जन को कम करना है. हालाँकि, इथेनॉल 20 के मिश्रण से इसे और बेहतर करके RON 95 कर दिया गया है.

43,000 करोड़ की होगी बचत

इथेनॉल के मिलने से जो पैसा पहले कच्चे तेल के आयात पर खर्च होता था, वह अब किसानों के पास जा रहा है. इसके इस्तेमाल से लगभग 736 लाख मीट्रिक टन CO2 उत्सर्जन में कमी आई है, जो 30 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है. 20% मिश्रण को लेकर ऐसा कहा जा रहा है कि अकेले इस साल किसानों को 40,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा और विदेशी मुद्रा की बचत लगभग 43,000 करोड़ रुपये होगी।E20 Fuel: E20 फ्यूल विवाद खत्म! सुप्रीम कोर्ट ने कहा-नीति पर हस्तक्षेप नहीं होगा

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