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E-Tender Scam : बिचौलिए खरे की जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा EOW

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भोपाल । मध्यप्रदेश के बहुचर्चित अरबों रुपए के ई-टेंडर घोटाले में ईओडब्ल्यू को सुप्रीम कोर्ट जाने की अनुमति मिल गई है। जल संसाधन विभाग के टेंडरों में टेंपरिंग कराने वाले बिचौलिए मनीष खरे की जमानत के खिलाफ ईओडब्ल्यू सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर करेगा। मामले में नई एफआईआर दर्ज करने की तैयारी भी है। सोरठिया वेलजी एंड रत्ना कंपनी के एक पदाधिकारी को भी आरोपित बनाया जा सकता है।

अरबों रुपए के ई-टेंडर घोटाले में जांच एजेंसी ईओडब्ल्यू को कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सर्ट) की एनालिसिस रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट मिलते ही मामले में नई एफआईआर दर्ज करवाई जा सकती है। ईओडब्ल्यू ने ‘सर्ट” की एनालिसिस रिपोर्ट के लिए मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण हार्ड डिस्क भेजी हैं, इनमें टेंपरिंग की पुष्टि हुई है।

सोरठिया वेलजी एंड रत्ना कंपनी के एक अन्य पदाधिकारी को भी आरोपित बनाया जा सकता है। सोरठिया और मनीष खरे के खातों में करोड़ों रुपए की रिश्वत के लेनदेन के साक्ष्य मिले थे। उल्लेखनीय है कि मनीष खरे को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है, उसकी जमानत को निरस्त कराने के लिए ईओडब्ल्यू ने सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर ली है।

इस बहुचर्चित घोटाले की जांच में खुलासा हुआ था कि ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के जरिए मप्र जल निगम, लोक निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग, मप्र सड़क विकास निगम और लोक निर्माण विभाग पीआईयू की निविदाओं के सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ की गई थी। ईओडब्ल्यू ने हार्ड डिस्क जब्त कर एनालिसिस रिपोर्ट के लिए ‘सर्ट” को भेजी हैं, जिसकी रिपोर्ट मिलने के बाद कुछ और नए मामले दर्ज किए जाएंगे।

गुजरात की कंपनी सोरठिया वेलजी एंड रत्ना के एजेंट के रूप में काम करने वाला मनीष खरे मूलत: उत्तरप्रदेश के जालौन का रहने वाला है। मात्र कक्षा नौवीं तक शिक्षित मनीष के पिता रेलवे में तृतीय श्रेणी कर्मचारी रहे, जिस कारण उसकी रेलवे में पैठ बनी और वहां पेटी कांट्रेक्टर के तौर पर काम करने लगा।

उसे ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन्स के माध्यम से टेंडर खुलने के पहले जानकारी मिल जाती थी। इसके बाद खरे टेंडर में भाग लेने वाली उन कंपनियों से बात कर ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन्स से मिलकर टेंपरिंग कर टेंडर की कीमत बदल देता था।

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