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Dussehra 2026: दशहरे पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन क्यों माने जाते हैं बेहद शुभ? जानिए धार्मिक महत्व, पौराणिक कथा और खास मंत्र

Dussehra 2026: दशहरे पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन क्यों माने जाते हैं बेहद शुभ? जानिए धार्मिक महत्व, पौराणिक कथा और खास मंत्र

Dussehra 2026: दशहरे पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन क्यों माने जाते हैं बेहद शुभ? जानिए धार्मिक महत्व, पौराणिक कथा और खास मंत्र

Dussehra 2026: दशहरे पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन क्यों माने जाते हैं बेहद शुभ? जानिए धार्मिक महत्व, पौराणिक कथा और खास मंत्र

नई दिल्ली: 20 अक्टूबर 2026 को पूरे देश में विजयादशमी यानी दशहरे का पावन पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक यह दिन धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दशहरे के दिन भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण जी और बजरंगबली की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इसी के साथ इस दिन एक खास धार्मिक परंपरा नीलकंठ पक्षी के दर्शन से भी जुड़ी हुई है।

धार्मिक शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी के दिन नीलकंठ पक्षी का दिखाई देना सोई हुई किस्मत के जागने का संकेत होता है। यदि यह पक्षी घर की छत, आंगन या आसपास दिखे, तो इसे परिवार के लिए सुख-शांति, समृद्धि और आरोग्य का सूचक माना जाता है।

नीलकंठ के दर्शन के पीछे पौराणिक कथाएं

  1. भगवान श्रीराम और विजय का आशीर्वाद:

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब प्रभु श्रीराम लंकापति रावण का वध करने जा रहे थे, तब उन्होंने रास्ते में नीलकंठ पक्षी के दर्शन किए थे। इसके बाद ही उन्हें युद्ध में विजय प्राप्त हुई थी। तभी से विजयादशमी पर इस पक्षी को देखना कार्यों में सफलता और विजय का प्रतीक माना जाने लगा।

  2. भगवान शिव का रूप और कृपा:

    धार्मिक मान्यताओं में नीलकंठ पक्षी का सीधा संबंध महादेव से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि रावण वध के बाद भगवान शिव ने स्वयं नीलकंठ का रूप धारण कर प्रभु राम को दर्शन दिए थे। समुद्र मंथन के समय विषपान करने से महादेव का कंठ भी नीला पड़ा था, जिसके कारण उन्हें ‘नीलकंठ’ कहा जाता है। दशहरे के दिन नीलकंठ के दर्शन से साधक पर शिवजी की असीम कृपा बनी रहती है और जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है।

दर्शन के समय करें इस सिद्ध मंत्र का जाप

यदि दशहरे के पावन दिन आपको कहीं नीलकंठ पक्षी के दर्शन हो जाएं, तो मन ही मन उन्हें नमन करें और सौभाग्य वृद्धि के लिए इस मंत्र का जाप करें:

मंत्र:

कृत्वा नीराजनं राजा बालवृद्धयं यता बलम्। शोभनम खंजनं पश्येज्जलगोगोष्ठसंनिघौ।।

नीलग्रीव शुभग्रीव सर्वकामफलप्रद। पृथ्वियामवतीर्णोसि खञ्जरीट नमोस्तु तो।।

शास्त्रों के अनुसार, नीलकंठ के दर्शन के साथ इस मंत्र का उच्चारण करने से जीवन के आर्थिक संकट दूर होते हैं, मान-सम्मान में वृद्धि होती है और रुके हुए कार्य बिना किसी बाधा के संपन्न हो जाते हैं। Dussehra 2026: दशहरे पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन क्यों माने जाते हैं बेहद शुभ? जानिए धार्मिक महत्व, पौराणिक कथा और खास मंत्र

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