शासकीय धान की मिलिंग में देरी से शासन को बढ़ा अरबों रुपये प्रतिमाह का नुकसान, प्रदेश के मिलर्सो ने खाद्य मंत्री एवं अपर मुख्य सचिव खाद्य को सौंपा ज्ञापन
कटनी – जिले के साथ प्रदेश में धान की कस्टम मिलिंग में हो रही देरी और उससे प्रतिमाह हो रहे अरबों रुपये के आर्थिक नुकसान को लेकर राइस मिलर्सो की चिंता अब खुलकर सामने आ गई है। इस संबंध में मिलर्स प्रतिनिधिमंडल ने खाद्य मंत्री गोविंद सिंग राजपूत, अपर मुख्य सचिव खाद्य से भोपाल में मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा और शीघ्र समाधान की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष आशीष अग्रवाल, महासचिव ईश्वर रोहरा, माखन निषाद सहित एवं अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।
मिलर्स ने मंत्री को अवगत कराया कि धान की धीमी मिलिंग के कारण शासन को हर माह अरबों रुपये का नुकसान हो रहा है, वहीं मिलर्स को भी मिलिंग करने में आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अपग्रेडेशन राशि जारी करने, शासकीय धान की ट्रायल मिलिंग के आधार पर वास्तविक मिलिंग करवाने, बारदाना उपयोगिता व्यय के राज्यांश का लंबित भुगतान और परिवहन व्यय में संशोधन जैसी प्रमुख मांगें रखीं।
प्रतिनिधिमंडल ने आग्रह किया कि शासन इन मांगों पर शीघ्र निर्णय लेकर मिलिंग प्रक्रिया को गति दे, जिससे न केवल मिलर्स को राहत मिले बल्कि सरकार को हो रहे नुकसान को भी रोका जा सके।
प्रदेश में किसानों से लगभग 5 करोड़ क्विंटल धान उपार्जित हुई है, जिस पर प्रति क्विंटल लगभग 10/- से 50 करोड़ का गोदाम भंडारण व्यय, 20/- प्रति क्विंटल से 100 करोड़ का ब्याज का नुकसान एवं इसके अलावा लगभग 50 करोड़ का सुखत आदि का नुकसान हो रहा है, जो कुल मिलाकर प्रतिमाह लगभग 200/- करोड़ रुपये होता है, इसके अलावा जो धान खुले कैपो में शासन द्वारा रखी गई है उस पर धूप, बारिश में सड़ने का खतरा भी मंडरा रहा है।

