भारतीय शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों का दबदबा, SIP निवेश ने बनाया नया रिकॉर्ड, भारतीय शेयर बाजार में अब बड़े विदेशी निवेशकों की पकड़ कमजोर होती दिख रही है और इसकी कमान धीरे-धीरे रिटेल निवेशकों के हाथों में आती जा रही है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के मार्च महीने के ताजा आंकड़े इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। आम निवेशकों ने सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश का नया रिकॉर्ड बना दिया है।
भारतीय शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों का दबदबा, SIP निवेश ने बनाया नया रिकॉर्ड
मार्च में SIP के जरिए कुल निवेश 32,087 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो फरवरी के 29,845 करोड़ रुपये की तुलना में 8% अधिक है। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है, जिससे साफ है कि लोग अब पारंपरिक बचत योजनाओं की बजाय शेयर बाजार आधारित निवेश की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
इक्विटी फंड्स में जोरदार उछाल, 40 हजार करोड़ से ज्यादा निवेश
SIP की मजबूती का सीधा असर इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर देखने को मिला है। मार्च में इक्विटी फंड्स में कुल निवेश 40,450 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो फरवरी के 25,977 करोड़ रुपये की तुलना में 56% की बढ़ोतरी दर्शाता है। सालाना आधार पर यह 61% की मजबूत ग्रोथ है।
यह साफ संकेत देता है कि निवेशक लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न के लिए इक्विटी बाजार पर भरोसा जता रहे हैं और जोखिम के बावजूद निवेश बढ़ा रहे हैं।
फ्लेक्सी कैप और स्मॉलकैप फंड्स में बढ़ा क्रेज
निवेशकों की सबसे ज्यादा पसंद फ्लेक्सी कैप फंड्स बने हुए हैं, जिनमें मार्च में 10,054 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। यह लगातार दूसरा महीना है जब इस कैटेगरी में 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक निवेश दर्ज किया गया है।
इसके अलावा स्मॉलकैप फंड्स में 6,263 करोड़ रुपये और मिडकैप फंड्स में 6,063 करोड़ रुपये का निवेश देखने को मिला है। यह दर्शाता है कि निवेशक अब छोटी और मझोली कंपनियों में भी तेजी से पैसा लगा रहे हैं।
डेट और हाइब्रिड फंड्स से भारी निकासी
जहां इक्विटी फंड्स में निवेश बढ़ा है, वहीं डेट म्यूचुअल फंड्स से मार्च में लगभग 2.94 लाख करोड़ रुपये की भारी निकासी दर्ज की गई। इसका मुख्य कारण वित्त वर्ष का अंत और कॉरपोरेट्स द्वारा एडवांस टैक्स भुगतान बताया जा रहा है।
लिक्विड फंड्स से 1.34 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई, जबकि ओवरनाइट और मनी मार्केट फंड्स से भी बड़ी रकम बाहर निकली। इसके साथ ही हाइब्रिड फंड्स से 16,538 करोड़ रुपये की निकासी देखी गई।
हालांकि, मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स में 5,212 करोड़ रुपये का नया निवेश दर्ज किया गया, जो बाजार में संतुलित निवेश की ओर इशारा करता है।कुल मिलाकर, मार्च का महीना भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए ऐतिहासिक रहा, जहां रिटेल निवेशकों ने बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाई। SIP और इक्विटी फंड्स में बढ़ता निवेश यह संकेत देता है कि आने वाले समय में आम निवेशक भारतीय शेयर बाजार की सबसे बड़ी ताकत बने रहेंगे।

