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क्या आपको पता है फर्स्ट ट्राइमेस्टर में अल्ट्रासाउंड कराना क्‍यों जरूरी है और इसके क्‍या फायदे हो सकते हैं?

क्या आपको पता है फर्स्ट ट्राइमेस्टर में अल्ट्रासाउंड कराना क्‍यों जरूरी है और इसके क्‍या फायदे हो सकते हैं? फर्स्ट ट्राइमेस्टर में अल्‍ट्रासाउंड प्रीनेटल केयर का जरूरी हिस्सा है। यह न केवल यह निर्धारित करने में मदद करता है कि भ्रूण (फ़ीटस) ठीक से बढ़ रहा है या नहीं, बल्कि माता-पिता को अपने अजन्मे से जुड़ने में भी मदद करता है। अल्ट्रासाउंड भ्रूण के दिल की धड़कन, बच्चे की शारीरिक रचना और सामान्य हेल्‍थ की पुष्टि करने में मदद करता है। फर्स्ट ट्राइमेस्टर में अल्ट्रासाउंड- विशेष रूप से डेटिंग स्कैन और एनटी स्कैन से जुड़ी कुछ बातों के बारे में एक्‍सपर्ट से विस्‍तार में जानते हैं।

फर्स्ट ट्राइमेस्टर में –

 *डेटिंग स्कैन* –

छठे और दसवें हफ्ते के बीच में एक अल्‍ट्रासाउंड होता है, यह अल्ट्रासाउंड रूटीन चेकअप का अनिवार्य हिस्सा है। इसे डेटिंग स्कैन के नाम से भी जाना जाता है। यह अल्ट्रासाउंड न केवल भ्रूण के दिल की धड़कन की स्क्रीनिंग करता है, बल्कि माता-पिता इस अल्‍ट्रासाउंड की मदद से अपने होने वाले बच्चे को पहली बार देख सकते हैं।

क्या आपको पता है फर्स्ट ट्राइमेस्टर में अल्ट्रासाउंड कराना क्‍यों जरूरी है और इसके क्‍या फायदे हो सकते हैं?

*प्रेग्‍नेंसी के फर्स्ट ट्राइमेस्टर में किया गया अल्ट्रासाउंड निम्‍न बातों में मदद करता है:*

 

  • नियत तारीख का निर्धारण – फर्स्ट ट्राइमेस्टर के बाद भ्रूण को मापना मुश्किल हो जाता है। इसलिए, फर्स्ट ट्राइमेस्टर के अल्ट्रासाउंड में, भ्रूण को प्रभावी ढंग से मापा जाता है, ताकि डिलीवरी की सही तारीख निर्धारित हो सके।

  • फर्स्ट ट्राइमेस्टर में अल्ट्रासाउंड से भ्रूण के दिल की धड़कन की पुष्टि की जाती है।

  • भ्रूण की संख्या निर्धारित की जाती है। कहीं प्रेग्‍नेंट महिला के जुड़वां, ट्रिपल या इससे ज्‍यादा भ्रूण तो नहीं है। फर्स्ट ट्राइमेस्टर में अल्ट्रासाउंड वह है जो गर्भ में भ्रूण की संख्या और उनकी कोरियोनिटी निर्धारित करने में मदद करता है।

  • अल्ट्रासाउंड इस बात को सुनिश्चित करने में भी मदद करता है कि प्रेग्‍नेंसी अपने नॉर्मल कोर्स में है या नहीं। साथ ही यूट्रस और भ्रूण में कोई असामान्यता तो नहीं दिखाई दे रही है।

  • फर्स्ट ट्राइमेस्टर का अल्ट्रासाउंड गर्भकालीन आयु का निर्धारण करने में सबसे सटीक होता है, यह प्रेग्‍नेंसी की जीवनक्षमता को भी प्रभावी ढंग से मापता है। साथ ही अगर प्रेग्‍नेंसी में कोई भी मिसकैरेज के लक्षण दिखाई दे रहे होते हैं, तो डॉक्‍टर अल्ट्रासाउंड करने के लिए कहता है। इससे पता चल जाता है कि सब कुछ ठीक है या नहीं।

क्या आपको पता है फर्स्ट ट्राइमेस्टर में अल्ट्रासाउंड कराना क्‍यों जरूरी है और इसके क्‍या फायदे हो सकते हैं?

  • फर्स्ट ट्राइमेस्टर में, डॉक्टर आमतौर पर पेट के अल्ट्रासाउंड के विपरीत ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड का विकल्प चुनते हैं। इस तरह के अल्ट्रासाउंड में, डॉक्टर या उनका सहायक गर्भ में जेस्टेशनल सैक, योक सैक, हार्ट रेट और फीटल पोल को मापने के लिए वेजाइना में प्रोब डालते हैं। पेट की स्कैनिंग में, ब्‍लैडर का पूरी तरह से भरा होना जरूरी होता है। फिर डॉक्टर / सहायक पेट पर जैल लगाकर और एक ट्रांसीवर की मदद से विभिन्न एंगल से जांच करते हैं।

 *एनटी स्कैन क्या है और यह कैसे मदद करता है?**

यह एक कॉमन स्क्रीनिंग टेस्‍ट है, जो बच्चे के गर्दन के पीछे जमा लिक्विड के साइज को मापता है। प्रेग्‍नेंसी के फर्स्ट ट्राइमेस्टर में भ्रूण की गर्दन के पीछे की त्वचा के नीचे जमा लिक्विड की इस सोनोग्राफिक उपस्थिति को न्यूकल ट्रांसलुसेंसी के रूप में जाना जाता है। भले ही वह अलग हो या न हो और चाहे वह गर्दन या पूरे भ्रूण तक ही सीमित हो, इसके लिए ट्रांसलुसेंसी शब्द का उपयोग किया जाता है। अगर यह प्रकट होता है और इसका माप भ्रूण CRL माप से 90% से ज्‍यादा है, तो बच्चे में क्रोमोसोमल असामान्यता जैसे डाउन सिंड्रोम, एडवर्ड्स सिंड्रोम, या पटाऊ-सिंड्रोम होने की संभावना रहती है। NT स्कैन पेट, वेजाइना, या दोनों तरह का अल्ट्रासाउंड करके किया जाता है।

  • भ्रूण में किसी भी तरह की असामान्यता की जांच करने के लिए प्रेग्‍नेंसी के 11 वें और 13.6 हफ्ते के बीच एक न्यूकल ट्रांसलुसेंसी (NT) स्कैन किया जाता है।

  • इस स्कैन के समय क्रोमोसोमल असामान्यताएं जैसे डाउन सिंड्रोम, एडवर्ड्स सिंड्रोम, या पटाऊ-सिंड्रोम के लिए संयुक्त स्क्रीनिंग की सलाह दी जाती है।

  • अगर भ्रूण या अन्य स्वास्थ्य संबंधी विवरणों का निर्धारण करने में अल्ट्रासाउंड के परिणाम स्पष्ट नहीं होते हैं, तो डॉक्टर कुछ दिनों या हफ्तों के अंतराल के साथ एक और अल्ट्रासाउंड की सलाह देगा।

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