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Diwali Puja Shubh Muhurat : जानिये दीवाली पर लक्ष्‍मी पूजा का मुहूर्त, प्रदोष काल, लाभ, अमृत और शुभ चौघड़िया

diwali2020

Diwali Puja Shubh Muhurat : दीपावली को दीप उत्सव भी कहा जाता है। क्योंकि दीपावली का मतलब होता है दीपों की अवली यानि पंक्ति। दिवाली या दीपावली हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है। हिंदू धर्म में दिवाली का विशेष महत्व है। धनतेरस से भाई दूज तक करीब 5 दिनों तक चलने वाला दिवाली का पर्व भारत और नेपाल समेत दुनिया के कई देशों में मनाया जाता है। दिवाली का पर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। हिंदू धर्म के अलावा बौद्ध, जैन और सिख धर्म के अनुयायी भी दिवाली मनाते हैं। जैन धर्म में दिवाली को भगवान महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाया जाता है। वहीं सिख समुदाय में इसे बंदी छोड़ दिवस के तौर पर मनाते हैं। आइए जानते हैं कि 2020 में दिवाली कब है व दिवाली 2020 की तारीख व मुहूर्त।

दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त –

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त्त :17:30:04 से 19:25:54 तकअवधि :1 घंटे 55 मिनटप्रदोष काल :17:27:41 से 20:06:58 तकवृषभ काल :17:30:04 से 19:25:54 तक

दिवाली महानिशीथ काल मुहूर्त

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त्त :23:39:20 से 24:32:26 तकअवधि :0 घंटे 53 मिनटमहानिशीथ काल :23:39:20 से 24:32:26 तकसिंह काल :24:01:35 से 26:19:15 तक

चौघड़िया

अपराह्न मुहूर्त्त (लाभ, अमृत):14:20:25 से 16:07:08 तकसायंकाल मुहूर्त्त (लाभ):17:27:41 से 19:07:14 तकरात्रि मुहूर्त्त (शुभ, अमृत, चल):20:46:47 से 25:45:26 तकउषाकाल मुहूर्त्त (लाभ):29:04:32 से 30:44:04 तक

 

दिवाली पर कब करें लक्ष्मी पूजा?

मुहूर्त का नामसमयविशेषतामहत्वप्रदोष कालसूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्तलक्ष्मी पूजन का सबसे उत्तम समयस्थिर लग्न होने से पूजा का विशेष महत्वमहानिशीथ कालमध्य रात्रि के समय आने वाला मुहूर्तमाता काली के पूजन का विधानतांत्रिक पूजा के लिए शुभ समय

 

  1. देवी लक्ष्मी का पूजन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त) में किया जाना चाहिए। प्रदोष काल के दौरान स्थिर लग्न में पूजन करना सर्वोत्तम माना गया है। इस दौरान जब वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि लग्न में उदित हों तब माता लक्ष्मी का पूजन किया जाना चाहिए। क्योंकि ये चारों राशि स्थिर स्वभाव की होती हैं। मान्यता है कि अगर स्थिर लग्न के समय पूजा की जाये तो माता लक्ष्मी अंश रूप में घर में ठहर जाती है।

 

  1. महानिशीथ काल के दौरान भी पूजन का महत्व है लेकिन यह समय तांत्रिक, पंडित और साधकों के लिए ज्यादा उपयुक्त होता है। इस काल में मां काली की पूजा का विधान है। इसके अलावा वे लोग भी इस समय में पूजन कर सकते हैं, जो महानिशिथ काल के बारे में समझ रखते हों।

दिवाली पर लक्ष्मी पूजा की विधि

दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का विशेष विधान है। इस दिन संध्या और रात्रि के समय शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी, विघ्नहर्ता भगवान गणेश और माता सरस्वती की पूजा और आराधना की जाती है। पुराणों के अनुसार कार्तिक अमावस्या की अंधेरी रात में महालक्ष्मी स्वयं भूलोक पर आती हैं और हर घर में विचरण करती हैं। इस दौरान जो घर हर प्रकार से स्वच्छ और प्रकाशवान हो, वहां वे अंश रूप में ठहर जाती हैं इसलिए दिवाली पर साफ-सफाई करके विधि विधान से पूजन करने से माता महालक्ष्मी की विशेष कृपा होती है। लक्ष्मी पूजा के साथ-साथ कुबेर पूजा भी की जाती है। पूजन के दौरान इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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