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भारत की तकनीकी संप्रभुता पर मंडराता खतरा: स्टारलिंक को लेकर कूटनीति फाउंडेशन का बड़ा अलर्ट

भारत में लॉन्च के लिए तैयार Starlink इंटरनेट, सस्ती कीमत में मिलेगा हाई-स्पीड डेटा

भारत में लॉन्च के लिए तैयार Starlink इंटरनेट, सस्ती कीमत में मिलेगा हाई-स्पीड डेटा

भारत की तकनीकी संप्रभुता पर मंडराता खतरा: स्टारलिंक को लेकर कूटनीति फाउंडेशन का बड़ा अलर्ट

नई दिल्ली: देश के एक प्रमुख रिसर्च संस्थान ‘कूटनीति फाउंडेशन’ (Kootneeti Foundation) ने भारत सरकार से विदेशी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडरों पर कड़े और गैर-समझौतावादी नियम लागू करने की सिफारिश की है। संस्थान की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इलॉन मस्क की कंपनी ‘स्टारलिंक’ (SpaceX – Starlink) की भारत में एंट्री अमेरिकी रणनीतिक दबदबे को बढ़ा सकती है, जिससे देश की तकनीकी संप्रभुता (Technological Sovereignty) कमजोर होने का खतरा है।

जियो-पॉलिटिकल कंट्रोल का जरिया बन सकता है स्टारलिंक

कूटनीति फाउंडेशन (जिसकी रिपोर्ट नवंबर 2024 में प्रकाशित और अक्टूबर 2026 में अपडेट हुई) के अनुसार:

2021 से भारत में दस्तक देने की कोशिश, लेकिन सुरक्षा मंजूरी अटकी

स्टारलिंक (जो पृथ्वी की निचली कक्षा या LEO सैटेलाइट्स के जरिए दुर्गम इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट देती है) 2021 से ही भारतीय बाजार में प्रवेश के लिए प्रयासरत है:

  1. मिले थे लाइसेंस: कंपनी को जून 2025 में मुख्य लाइसेंस मिले और अगले ही महीने अंतरिक्ष नियामक IN-SPACe से शुरुआती मंजूरी मिली थी।

  2. क्यों अटका है मामला? अंतिम सुरक्षा मंजूरी, स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया और विदेशी निवेश की अनुमति लंबित होने के कारण स्टारलिंक सेवाएं शुरू नहीं हो पाई हैं।

  3. डेटा सुरक्षा पर बड़ा सवाल: भारतीय अधिकारी इस बिंदु की भी जांच कर रहे हैं कि क्या सैटेलाइट्स के बीच डायरेक्ट संपर्क (Inter-satellite links) के माध्यम से भारत का डेटा घरेलू गेटवे (Gateways) को दरकिनार कर विदेश भेजा जा सकता है।

सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता से जुड़े इन लंबित मुद्दों के चलते भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग लगातार टल रही है।

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