Delhi HC Verdict on TV Ads: टीवी दर्शकों को बड़ी राहत-दिल्ली हाई कोर्ट ने माना सही- 1 घंटे में केवल 12 मिनट ही दिखाए जा सकेंगे विज्ञापन, चैनलों की याचिकाएं खारिज
नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के उस नियम को पूरी तरह सही ठहराया है, जिसके तहत टेलीविजन चैनलों पर विज्ञापन दिखाने की समय सीमा अधिकतम 12 मिनट प्रति घंटा तय की गई थी। जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने विभिन्न टीवी ब्रॉडकास्टर्स द्वारा दायर उन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें ट्राई के इस नियम को चुनौती दी गई थी।
अदालत के इस फैसले के बाद अब टीवी चैनल हर एक घंटे के प्रसारण में 10 मिनट का कमर्शियल (व्यावसायिक) विज्ञापन और अधिकतम 2 मिनट का सेल्फ-प्रमोशनल कंटेंट (अपने ही चैनल के अन्य शोज़ का प्रचार) ही दिखा सकेंगे।
Delhi HC Verdict on TV Ads: टीवी दर्शकों को बड़ी राहत! दिल्ली हाई कोर्ट ने माना सही- 1 घंटे में केवल 12 मिनट ही दिखाए जा सकेंगे विज्ञापन, चैनलों की याचिकाएं खारिज
13 साल पुराना है यह विवाद; क्यों कोर्ट पहुंचे थे ब्रॉडकास्टर्स?
यह कानूनी लड़ाई एक दशक से भी ज्यादा समय से पेंडिंग थी। ट्राई ने साल 2012 और 2013 में केबल टेलीविजन नेटवर्क रूल्स, 1994 के नियम 7(11) के तहत यह 12 मिनट की कैपिंग (सीमा) लगाई थी।
-
ब्रॉडकास्टर्स की दलील: कई जनरल एंटरटेनमेंट चैनलों, न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स और रीजनल टेलीविजन नेटवर्क्स ने इस नियम का कड़ा विरोध किया था। उनका तर्क था कि यह सीमा संविधान के आर्टिकल 14 और 19 के तहत मिले उनके व्यापारिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।
-
कमाई डूबने का डर: न्यूज और फ्री-टू-एयर (फ्री डिश वाले) चैनलों ने कहा था कि उनका अस्तित्व पूरी तरह विज्ञापन से होने वाली कमाई (Advertising Revenue) पर निर्भर है। इस लिमिट से उनकी फाइनेंशियल सस्टेनेबिलिटी (वित्तीय स्थिति) को बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा।
हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की चैनलों की अपील? दिए ये 2 मुख्य तर्क
ब्रॉडकास्टर्स की तमाम दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए डिवीजन बेंच ने कंज्यूमर वेलफेयर (उपभोक्ता कल्याण) को सर्वोपरि माना:
-
दर्शक रियल टाइम में एडवर्टाइजमेंट स्किप नहीं कर सकते: कोर्ट ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म (जैसे यूट्यूब या ओटीटी) की तरह टेलीविजन देखने वाले दर्शक लाइव या रियल टाइम में विज्ञापनों को ‘स्किप’ (Skip) नहीं कर सकते। बहुत ज्यादा और लंबे ब्रेक आने से दर्शकों के टीवी देखने के अनुभव (Viewing Experience) की क्वालिटी खराब होती है।
-
बिजनेस और कंज्यूमर के बीच संतुलन जरूरी: बेंच ने साफ किया कि 12 मिनट की यह लिमिट एक ऐसा स्टैंडर्ड है, जो चैनलों के कमर्शियल इंटरेस्ट (व्यावसायिक हित) और उपभोक्ताओं के अधिकारों के बीच एक सटीक संतुलन (Balance) बनाता है।
अदालत ने अंत में फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्राई का यह नियम पूरी तरह संवैधानिक है और ब्रॉडकास्टर्स की याचिकाएं खारिज की जाती हैं।
ट्राई (TRAI) के नए नियम का पूरा गणित
| पैमाना | नया नियम (प्रति घंटा) | असर किस पर पड़ेगा? |
| कमर्शियल विज्ञापन | अधिकतम 10 मिनट | सभी एंटरटेनमेंट, मूवी और रीजनल चैनल्स। |
| सेल्फ-प्रमोशन | अधिकतम 2 मिनट | चैनल के अपने ही आगामी शोज़ के प्रोमो। |
| कुल ब्रेक समय | अधिकतम 12 मिनट | प्रति 60 मिनट के स्लॉट में। |
| मुख्य उद्देश्य | दर्शकों के अनुभव को सुधारना | विज्ञापन के बोझ से आम जनता को बचाना। |








