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Deep Space Discovery: ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्य से उठा पर्दा-भारतीय वैज्ञानिकों ने 19 साल की खोज के बाद महाकाय ब्लैक होल में ढूंढा अनोखा प्रकाश चक्र

Deep Space Discovery: ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्य से उठा पर्दा-भारतीय वैज्ञानिकों ने 19 साल की खोज के बाद महाकाय ब्लैक होल में ढूंढा अनोखा प्रकाश चक्र

Deep Space Discovery: ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्य से उठा पर्दा-भारतीय वैज्ञानिकों ने 19 साल की खोज के बाद महाकाय ब्लैक होल में ढूंढा अनोखा प्रकाश चक्र

नैनीताल/Deep Space Discovery: ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्य से उठा पर्दा-भारतीय वैज्ञानिकों ने 19 साल की खोज के बाद महाकाय ब्लैक होल में ढूंढा ‘अनोखा प्रकाश चक्र’। वाशिंगटन ब्रह्मांड की गहराइयों में छिपे राज हमेशा से मानव सभ्यता को हैरान करते रहे हैं। इस दिशा में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक संयुक्त टीम ने अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक खोज की है। वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से अरबों प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक महाकाय ब्लैक होल के भीतर एक अत्यंत दुर्लभ और रहस्यमय ‘प्रकाश चक्र’ (Light Cycle) की खोज की है, जो विज्ञान की पुरानी थ्योरी को पूरी तरह बदल सकता है।

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Deep Space Discovery: ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्य से उठा पर्दा-भारतीय वैज्ञानिकों ने 19 साल की खोज के बाद महाकाय ब्लैक होल में ढूंढा अनोखा प्रकाश चक्र

19 साल की तपस्या और ‘3C 454.3’ का रहस्य

इस ऐतिहासिक खोज के लिए वैज्ञानिकों ने ‘होल अर्थ ब्लेजर टेलीस्कोप’ (Whole Earth Blazar Telescope) परियोजना के तहत लगातार 19 वर्षों तक अंतरिक्ष के आंकड़ों का बारीकी से अध्ययन किया। तय समय पर बदलती है रोशनी: वैज्ञानिकों ने ‘3C 454.3’ नाम के एक अत्यधिक चमकीले ब्लेजर (Blazar) का अध्ययन किया। रिसर्च में सामने आया कि इस ब्लैक होल की चमक हर 433 दिन के एक निश्चित अंतराल पर घटती और बढ़ती है। ‘क्यूपीओ’ (QPO) का मिलना: विज्ञान की भाषा में इस तय चक्र को ‘ऑप्टिकल क्वासी-पीरियोडिक ऑस्सिलेशन’ (QPO) कहा जाता है। अब तक ऐसे संकेत सिर्फ एक्स-रे तरंगों में मिलते थे, लेकिन पहली बार दृश्य प्रकाश (Visible Light) में ऐसा दुर्लभ चक्र देखा गया है।

भारत के ‘ARIES’ संस्थान का बड़ा गौरव

इस महा-रिसर्च में भारत के उत्तराखंड (नैनीताल) स्थित आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (ARIES) के वैज्ञानिकों ने मुख्य और अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे वैश्विक विज्ञान जगत में भारत का डंका बज गया है।

क्या होता है ‘ब्लेजर’ (Blazar)?

सरल शब्दों में समझें तो ब्लेजर ब्रह्मांड की सबसे ऊर्जावान और सक्रिय आकाशगंगाएं (Active Galaxies) होती हैं इनके केंद्र में एक महाविशाल ब्लैक होल होता है, जो आसपास की गैस, मलबे और धूल को बहुत तेज गति से निगलता है। इस भयंकर घर्षण और प्रक्रिया से अत्यधिक ऊर्जा पैदा होती है, जिसे वैज्ञानिक ‘एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लियस’ (AGN) कहते हैं। जब इस केंद्र से निकलने वाली शक्तिशाली ऊर्जा और प्रकाश की सीधी धार (Jet) हमारी पृथ्वी की दिशा में होती है, तो उसे ‘ब्लेजर’ कहा जाता है।

सूरज से 230 करोड़ गुना भारी है यह ‘दानव’

वैज्ञानिकों के अनुसार, जिस ‘3C 454.3’ ब्लेजर में यह खोज हुई है, उसका वजन हमारे सूरज से 50 करोड़ से लेकर 230 करोड़ गुना तक ज्यादा है। इसका रेडशिफ्ट 0.86 है, जिसका सीधा मतलब यह है कि इस ब्लैक होल से निकलने वाले प्रकाश को हमारी पृथ्वी तक पहुंचने में अरबों वर्ष का समय लगा है। यानी आज हम जो रोशनी देख रहे हैं, वह ब्रह्मांड के इतिहास के शुरुआती दौर की है।

क्यों खास है यह खोज?

यह खोज वैज्ञानिकों को यह समझने का एक सुनहरा मौका देगी कि ब्लैक होल के आसपास इतनी भयंकर चुंबकीय शक्ति और ऊर्जा की शक्तिशाली जेट्स कैसे बनती हैं। इससे भविष्य में अंतरिक्ष की भौतिकी और गुरुत्वाकर्षण के नियमों को और बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। Deep Space Discovery: ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्य से उठा पर्दा-भारतीय वैज्ञानिकों ने 19 साल की खोज के बाद महाकाय ब्लैक होल में ढूंढा अनोखा प्रकाश चक्र

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