26 साल बाद जेल से बाहर आएगा ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड का मुख्य दोषी दारा सिंह! सुप्रीम कोर्ट का ओडिशा सरकार को सख्त निर्देश- 15 अगस्त तक पूरी करें रिहाई की प्रक्रिया
26 साल बाद जेल से बाहर आएगा ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड का मुख्य दोषी दारा सिंह! सुप्रीम कोर्ट का ओडिशा सरकार को सख्त निर्देश- 15 अगस्त तक पूरी करें रिहाई की प्रक्रिया
26 साल बाद जेल से बाहर आएगा ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड का मुख्य दोषी दारा सिंह! सुप्रीम कोर्ट का ओडिशा सरकार को सख्त निर्देश- 15 अगस्त तक पूरी करें रिहाई की प्रक्रिया
भुवनेश्वर/नई दिल्ली: देश के सबसे चर्चित और रूह कंपा देने वाले ‘ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड’ (Graham Staines Murder Case) के मुख्य दोषी दारा सिंह (62 वर्ष) की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। पिछले 26 वर्षों से बिना किसी पैरोल के ओडिशा की क्योंझर डिस्ट्रिक्ट जेल में बंद दारा सिंह को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा और बड़ा रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने ओडिशा सरकार को निर्देश दिया है कि आगामी 15 अगस्त 2026 की तय समय-सीमा से पहले उसकी रिहाई की प्रशासनिक प्रक्रिया को हर हाल में पूरा कर लिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच का बड़ा आदेश, 19 अगस्त को अगली सुनवाई
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में ‘दारा सेना’ की ओर से दायर याचिका पर जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच के समक्ष बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई हुई:
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सरकार को मोहलत: अदालत ने ओडिशा सरकार को दारा की समय से पहले रिहाई (Premature Release) पर अंतिम फैसला लेने के लिए 15 अगस्त तक का वक्त दिया है।
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सजा समीक्षा बोर्ड की मंजूरी: दारा सिंह के वकील ए.पी. सिंह ने बताया कि ओडिशा स्टेट सेंटेंस रिव्यू बोर्ड ने 6 जुलाई को हुई उच्च स्तरीय बैठक में दारा सिंह की समय से पहले रिहाई की सिफारिश पहले ही कर दी है। अब केवल स्थानीय प्रशासन द्वारा उसके मूल पते (औरैया, यूपी) के वेरिफिकेशन की औपचारिकता पूरी की जा रही है।
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मामले की अगली और अंतिम सुनवाई अब 19 अगस्त 2026 को मुकर्रर की गई है।
क्या है ओडिशा सरकार की ‘रिमिशन नीति’ (Remission Policy) जिसके तहत मिल रही छूट?
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के औरैया जिले का रहने वाला और बजरंग दल का पूर्व कार्यकर्ता दारा सिंह साल 2000 से लगातार जेल की सलाखों के पीछे है। उसकी रिहाई राज्य सरकार की विशेष रिमिशन (सजा माफी) नीति के तहत हो रही है:
नियम क्या कहता है?: ओडिशा सरकार की नीति के मुताबिक, यदि किसी कैदी की ‘मौत की सजा’ (Capital Punishment) को बाद में ‘उम्रकैद’ में तब्दील किया गया हो, तो जेल में बिना पैरोल के 25 साल की लंबी अवधि पूरी करने के बाद वह सजा समीक्षा बोर्ड की हरी झंडी और राज्य सरकार की मंजूरी से स्थाई रिहाई का हकदार हो जाता है। दारा सिंह यह अवधि पूरी कर चुका है।
क्या था 1999 का दिल दहला देने वाला मनोहरपुर कांड?
यह पूरा मामला 22 जनवरी 1999 का है, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था:
- जिंदा जलाया गया था परिवार: ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में एक ईसाई सम्मेलन में आए ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टुअर्ट स्टेन्स और उनके दो मासूम बेटों (फिलिप और टिमोथी) को दारा सिंह के नेतृत्व वाली उग्र भीड़ ने उस समय घेर लिया जब वे अपनी गाड़ी के भीतर सो रहे थे। भीड़ ने गाड़ी को बाहर से लॉक कर उसमें आग लगा दी थी, जिससे तीनों की जलकर मौत हो गई थी।
- लगा था धर्मांतरण का आरोप: भीड़ ने आरोप लगाया था कि स्टेन्स हिंदुओं का जबरन धर्मांतरण करा रहे थे, हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीपी वधवा आयोग की न्यायिक जांच में धर्मांतरण का कोई सबूत नहीं मिला। स्टेन्स वहां कुष्ठ रोगियों के लिए आश्रम चलाते थे।
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फांसी से उम्रकैद और अब रिहाई तक का कानूनी सफर
- 2003: सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत ने दारा सिंह समेत 14 लोगों को दोषी ठहराया और दारा को मौत की सजा सुनाई।
- 2005: ओडिशा हाई कोर्ट ने दारा सिंह की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया और 11 अन्य सह-आरोपियों को बरी कर दिया।
- 2011: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उम्रकैद के फैसले पर अंतिम मुहर लगाई थी।
- सह-आरोपी पहले ही रिहा: इस मामले में घटना के समय नाबालिग रहे चेनचु हंसदाह को 2008 में और एक अन्य दोषी महेंद्र हेम्ब्रम को पिछले साल ही जेल से रिहा किया जा चुका है।
अब मुख्य दोषी दारा सिंह की 26 साल बाद होने जा रही इस संभावित रिहाई ने एक बार फिर देश की सबसे बड़ी न्यायिक और राजनैतिक बहस को गरमा दिया है।








