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खतरनाक मोड़ उस पर भी सड़क पर जानलेवा गढ्ढ़े, लमतरा फ्लाई ओवर की अप्रोच रोड में जल्द सुधार की दरकार

खतरनाक मोड़ उस पर भी सड़क पर जानलेवा गढ्ढ़े, लमतरा फ्लाई ओवर की अप्रोच रोड में जल्द सुधार की दरकार

कटनी। कटनी – शहडोल बाईपास एवं कटनी – विजयराघवगढ़ मार्ग के संगम पर लमतरा रेल फाटक के कारण आवागमन में होने वाली परेशानी को दूर करने रेल प्रशासन और राज्य शासन के ब्रिज निर्माण कारपोरेशन द्वारा यहां फ्लाई ओवर का निर्माण कराया गया था पर अपनी ड्राइंग डिज़ायन से लेकर निर्माण की गुणवत्ता तक यह फ्लाई ओवर हमेशा आलोचना का शिकार होता रहा है।

 लमतरा फ्लाई ओवर की अप्रोच रोड में जल्द सुधार की दरकार

जबकि इसके बन जाने से न केवल शहडोल वरन बांधवगढ और बरही – विजयराघवगढ़ की ओर से कटनी आने – जाने वाले हजारों वाहन चालकों को एक बड़ी राहत मिली है। इन दिनों यह फ्लाई ओवर अपने खतरनाक मोड़ और जर्जर अप्रोच रोड को लेकर चर्चाओं में है।

लमतरा फ्लाई ओवर दो प्रमुख मार्गों के संगम पर बनाया गया है जिसमें चाका बाईपास से होकर फ्लाई ओवर में पहुंचने वाले कई वाहन सीधे जुहला होते हुए उमरिया,शहडोल की ओर चले जाते हैं।

इन वाहनों को कोई समस्या नहीं पर फ्लाई ओवर के बाद जिन्हें कैमोर,विजयराघवगढ़ आदि की ओर यात्रा करनी हो उन्हें फ्लाई ओवर के खत्म होते ही यू टर्न लेना पड़ता है। यह टर्निंग बेहद खतरनाक है। जगह बेहद कम पड़ती है ऊपर से दोनों ओर से आने – जाने वाले तेज रफ्तार वाहनों का खतरा भी बना रहता है। यहां टर्निंग प्वाइंट पर कुछ सुधार कार्य किया जाना था पर ब्रिज कारपोरेशन के अधिकारियों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।

इन दिनों फ्लाई ओवर से उतरने के बाद पड़ने वाले टर्निंग पर बड़े बड़े गढ्ढ़े भी हो गए हैं जिनमें भारी वाहन के टायर भी फंस जाते हैं। मार्ग में आगे जाकर विजयराघवगढ़ की ओर पड़ने वाले मोड़ पर भी सड़क बेहद क्षतिग्रस्त है। यहां सड़क के गढ्ढ़े भरा जाना और सुरक्षित टर्निंग के लिए रिंग रोड जैसा कुछ बनना चाहिये तभी यहां हादसों को रोका जा सकता है।
*यात्री प्रतीक्षालय भी बने।

 

फ्लाई ओवर बन जाने के बाद कैमोर, विजयराघवगढ़, कारीतला ई आदि ग्रामो से आकर बड़वारा, चंदिया, उमरिया की ओर जाने वाले यात्री फ्लाई ओवर की टर्निग पर ही उतर जाते हैं वहीं उमरिया, अमरकंटक, शहडोल आदि की ओर से आकर कैमोर, विजयराघवगढ़ की ओर जाने वाले यात्री भी इसी टर्निग में उतरकर अपने गंतव्य की ओर जाने वाली बसों का इंतज़ार करते हैं।

यहां यात्रियों को कड़ी धूप में खड़े होकर बसों का इंतज़ार करना पड़ता है। पेयजल का भी कोई इंतजाम नहीं है। यहां एक यात्री प्रतीक्षालय बन जाये साथ ही उसमें पेयजल की व्यवस्था भी हो तो यात्रियों को काफी राहत मिलेगी।

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