अतीक के बेटे आबान की कार से बरामद हुईं ‘अपराध और मनोविज्ञान’ की किताबें, भाई अली को जेल में देने जा रहा था
झांसी हादसे में मारे गए आबान की कार से मिलीं 'अपराध व मनोविज्ञान' की किताबें, जेल में बंद भाई अली को देने का था प्लान
अतीक के बेटे आबान की कार से बरामद हुईं ‘अपराध और मनोविज्ञान’ की किताबें, भाई अली को जेल में देने जा रहा था
झांसी: कुख्यात माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान अहमद की झांसी-कानपुर हाईवे पर हुए भीषण सड़क हादसे में हुई मौत के मामले में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। पूंछ थाना क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हुई कार की जब पुलिस ने तलाशी ली, तो उसमें से कई गंभीर, मनोवैज्ञानिक और दार्शनिक विषयों पर आधारित पुस्तकें बरामद हुई हैं।
शुरुआती जांच के अनुसार, आबान यह साहित्यिक संग्रह प्रयागराज से झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई अली अहमद को देने के लिए लेकर आ रहा था।
कार से मिलीं ये कालजयी और चर्चित किताबें
दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी से बरामद किताबों के मिलने के बाद जांच एजेंसियां और आम लोग हैरान हैं:
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फ्योदोर दोस्तोवस्की का साहित्य: कार से विश्व प्रसिद्ध रूसी साहित्यकार फ्योदोर दोस्तोवस्की (Fyodor Dostoevsky) की कालजयी कृतियां मिली हैं। दोस्तोवस्की की रचनाएं मुख्य रूप से अपराध (Crime), अपराधबोध (Guilt), मानवीय मनोविज्ञान (Human Psychology), नैतिक संघर्ष और जीवन के दार्शनिक पहलुओं पर आधारित होती हैं।
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मरजान कमाली का राजनीतिक उपन्यास: इसके अलावा, कार से लेखिका मरजान कमाली का चर्चित उपन्यास भी बरामद हुआ है, जिसकी कहानी वर्ष 1953 में ईरान (तेहरान) में हुए राजनीतिक तख्तापलट और ऐतिहासिक उथल-पुथल की पृष्ठभूमि पर आधारित है।
प्रयागराज से झांसी का सफर और दर्दनाक अंत
आबान अहमद प्रयागराज से कार द्वारा झांसी के लिए रवाना हुआ था। उसका एकमात्र मकसद झांसी जेल में बंद अपने भाई अली अहमद से मुलाकात कर उसे पढ़ने के लिए ये पुस्तकें सौंपना था। हालांकि, झांसी सीमा में प्रवेश करते ही पूंछ थाना क्षेत्र में उसकी तेज रफ्तार कार भीषण हादसे का शिकार हो गई, जिससे आबान की मौके पर ही मौत हो गई।
सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर छिड़ी नई बहस
जेल के भीतर बंद अतीक के बेटे अली अहमद तक अपराध, मनोविज्ञान, अपराधबोध और राजनीतिक तख्तापलट जैसे विषयों की गंभीर किताबें पहुँचाए जाने की खबर के बाद इंटरनेट और राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है:
चर्चा का विषय: लोग इस बात के अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं कि आखिर सलाखों के पीछे बंद अली अहमद इस प्रकार का गंभीर साहित्यिक और मनोवैज्ञानिक साहित्य क्यों पढ़ना चाहता था? क्या यह केवल पढ़ने का शौक था या जेल के भीतर मानसिकता में आ रहे बदलाव का संकेत?








