बलरामपुर: रिश्वतखोर बाबू को कोर्ट ने दी जेल: भृत्य से एरियर्स भुगतान के बदले लिए थे ₹12,000; विशेष अदालत ने सुनाई 3 साल की सजा। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी और सख्त कानूनी कार्रवाई सामने आई है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय वाड्रफनगर में पदस्थ एक लिपिक (बाबू) को भृत्य (चपरासी) से एरियर्स राशि के भुगतान के बदले 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) बलरामपुर की अदालत ने सुनवाई पूरी करते हुए आरोपित लिपिक गौतम सिंह आयम को दोषी करार दिया है।
रिश्वतखोर बाबू को कोर्ट ने दी जेल: भृत्य से एरियर्स भुगतान के बदले लिए थे ₹12,000; विशेष अदालत ने सुनाई 3 साल की सजा
अदालत ने दोषी बाबू को तीन वर्ष के सश्रम कारावास तथा 10 हजार रुपये के अर्थदंड (जुर्माने) की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष और पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला एक गरीब शासकीय कर्मचारी के हक की राशि से जुड़ा हुआ था:
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लंबित था ₹92,000 का एरियर्स: बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के वाड्रफनगर विकासखंड के अंतर्गत पूर्व माध्यमिक शाला ढढ़िया में नितेश रंजन पटेल बतौर भृत्य (चपरासी) पदस्थ हैं। नितेश का वर्ष 2013 से लेकर 2017 तक का लगभग 92 हजार रुपये का एरियर्स भुगतान लंबे समय से रुका हुआ था।
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फाइल आगे बढ़ाने के लिए मांगी रिश्वत: अपने हक के पैसों के भुगतान की कानूनी प्रक्रिया को पूरी कराने के लिए भृत्य नितेश लगातार विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय वाड्रफनगर के चक्कर काट रहा था। कार्यालय में पदस्थ लिपिक गौतम सिंह आयम ने इस फाइल को आगे बढ़ाने और राशि पास कराने के एवज में 12 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की।
एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के जाल में फंसा था आरोपी
भृत्य नितेश रंजन रिश्वत नहीं देना चाहता था, जिसके बाद उसने इसकी लिखित शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) / एंटी करप्शन टीम से की। योजना के मुताबिक, टीम ने वाड्रफनगर बीईओ कार्यालय में जाल बिछाया। जैसे ही लिपिक गौतम सिंह आयम ने भृत्य से रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 12 हजार रुपये हाथ में लिए, तभी पहले से घात लगाए बैठी टीम ने उसे केमिकल युक्त नोटों के साथ रंगे हाथों दबोच लिया था।
अदालत का सख्त संदेश
विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामले की गंभीरता, गवाहों के बयानों और एसीबी द्वारा पेश किए गए पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर लिपिक को दोषी ठहराया। अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि लोक सेवक (Public Servant) द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर किसी गरीब कर्मचारी को प्रताड़ित करना और रिश्वत मांगना एक गंभीर सामाजिक और कानूनी अपराध है, जिसमें किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।
अदालती आदेश के बाद दोषी लिपिक गौतम सिंह आयम को तुरंत कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया गया है।

