ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक 2026: नई परिभाषा पर विवाद, कार्यकर्ताओं का कहना– ‘मेडिकल बोर्ड से पहचान तय करना गलत’

ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक 2026: नई परिभाषा पर विवाद, कार्यकर्ताओं का कहना– ‘मेडिकल बोर्ड से पहचान तय करना गलत’

ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक 2026: नई परिभाषा पर विवाद, कार्यकर्ताओं का कहना– ‘मेडिकल बोर्ड से पहचान तय करना गलत’ नई दिल्ली / मुंबई / पुणे ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक 2026 में दी गई नई परिभाषा को लेकर ट्रांसजेंडर कम्युनिटी और कार्यकर्ताओं की तरफ से विरोध हो रहा है। विधेयक में 2019 के अधिनियम की धारा 4(2) को हटा दिया गया है, जिसमें पहले ट्रांसजेंडर व्यक्ति अपनी लैंगिक पहचान स्वयं घोषित कर सकते थे।

ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक 2026: नई परिभाषा पर विवाद, कार्यकर्ताओं का कहना– ‘मेडिकल बोर्ड से पहचान तय करना गलत’

पुरानी बनाम नई परिभाषा

पुरानी परिभाषा (2019):

ट्रांस-मेन, ट्रांस-वुमन, जेंडरक्वीर, नॉन-बाइनरी, पारंपरिक समुदाय जैसे हिजड़ा, किन्नर, अरावनी, जोगता, और इंटरसेक्स वैरिएशन शामिल थे।

नई परिभाषा (2026):

ट्रांसजेंडर व्यक्ति की पहचान स्पष्ट की गई। अब ट्रांस-महिला, ट्रांस-पुरुष और जेंडरक्वीर को हटाया गया। पहचान के लिए मेडिकल बोर्ड और सरकारी प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिया गया। नपुंसक और सर्जिकल/हार्मोनल प्रक्रियाओं से पहचान अपनाने वाले शामिल हैं।

 ट्रांसजेंडर कार्यकर्ताओं की आपत्ति

कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब उनकी शारीरिक और लैंगिक स्वतंत्रता सीमित हो गई है। मनस्वी गोइलकर ने कहा: “मेरा शरीर, मेरी पसंद। पहचान सरकार या मेडिकल रिपोर्ट द्वारा तय नहीं हो सकती। विरोध प्रदर्शनों का आयोजन मुंबई, दिल्ली, पुणे और कोलकाता में किया गया।

राजनीतिक और कानूनी प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने विधेयक की आलोचना की और कहा कि यह स्थापित संवैधानिक सुरक्षा को कमजोर कर सकता है।
विरोधकर्ताओं का मानना है कि यह विधेयक NALSA फैसले को कमजोर करता है, जिसने पहले किसी भी व्यक्ति को अपनी लैंगिक पहचान स्वयं तय करने का अधिकार दिया था।

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