
भारतीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग प्रणाली पर गहराया विदेशी निवेशकों का भरोसा: 2026 में जुटाए $12 अरब का विदेशी कर्ज, RBI के फैसले से मिली मजबूती
यश भारत। भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और बैंकिंग सेक्टर की साख के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय बैंकों की मांग तेजी से बढ़ी है। साल 2026 में देश के प्रमुख बैंकों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों से 12 अरब डॉलर की भारी-भरकम पूंजी जुटाई है।
विदेशी फंड की इस पर्याप्त लिक्विडिटी के कारण बैंक अब घरेलू बाजार में कारोबारियों और आम ग्राहकों को अधिक मजबूती से ऋण व वित्तीय सेवाएं प्रदान कर सकेंगे।
RBI का फैसला बना ‘संजीवनी’
भारतीय बैंकों के इस रिकॉर्ड प्रदर्शन के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ‘वन-टाइम स्वैप सुविधा’ (one-time swap facility) की मुख्य भूमिका रही है।
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31 अगस्त की समयसीमा: FCNR-B जमा के लिए 31 अगस्त 2026 तक बुक किए गए डिपॉजिट्स पर स्वैप सपोर्ट मिल रहा है, जिसके कारण बैंकों ने इस डेडलाइन से पहले फंड सुरक्षित करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी।
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फंड में उछाल: 5 जून को RBI द्वारा इस योजना की घोषणा किए जाने के बाद से जुटाए गए 12 अरब डॉलर में से 10 अरब डॉलर की रकम सिर्फ इस फैसले के बाद आई है।
HDFC बैंक का ऑल-टाइम रिकॉर्ड
विदेशी फंड जुटाने में देश का सबसे बड़ा निजी बैंक HDFC बैंक सबसे आगे रहा। बैंक ने अकेले 1.75 अरब डॉलर का इश्यू जुटाकर एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। इसके अलावा हालिया हफ्तों में ICICI बैंक, कोटक महिंद्रा, IDFC फर्स्ट बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी मिलकर 4.4 अरब डॉलर का फंड एकत्रित किया है।
ओवरसप्लाई के बावजूद शानदार रिस्पॉन्स
बाजार में एक साथ भारी सप्लाई आने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने भारतीय बैंकों की मूल क्रेडिट साख पर भरोसा जताया है। अमेरिकी ट्रेजरी में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय बॉन्ड्स औसतन 2.89 गुना ज्यादा सब्सक्राइब हुए हैं।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 के अंत तक भारतीय कॉर्पोरेट्स और बैंकों द्वारा विदेशी बाजार से और 5 से 7.5 अरब डॉलर की अतिरिक्त पूंजी जुटाने का सिलसिला जारी रहेगा।








