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Coin: iBUS में सिक्कों की कमी: 1–2 ₹ के बिना टिकट नहीं, खुल्ले पैसों की मांग बढ़ी

RBI ने 1 Rupees और 50 Paise को लेकर जारी किये नए रूल्स अगर आपके पास भी हो तो जान ले ये बात

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Coin: BUS में सिक्कों की कमी: 1–2 ₹ के बिना टिकट नहीं, खुल्ले पैसों की मांग बढ़ी। इंदौर की आईबस सेवा में सफर अब केवल दूरी का नहीं बल्कि ‘खुल्ले पैसे’ का भी सवाल बन गया है। किराए में हाल ही में हुई वृद्धि के बाद यात्रियों को 11, 16 और 21 रुपये जैसे अजीबो-गरीब किराए चुकाने पड़ रहे हैं। इस बदलाव ने यात्रियों को एक और दो रुपये के सिक्कों की कमी के कारण जबरदस्त परेशानी में डाल दिया है।

iBUS में सिक्कों की कमी: 1–2 ₹ के बिना टिकट नहीं, खुल्ले पैसों की मांग बढ़ी

अब स्थिति यह है कि यदि किसी यात्री के पास ठीक-ठीक किराया नहीं है, तो या तो उन्हें अतिरिक्त पैसा चुकाना पड़ता है, या फिर टिकट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। टिकट काउंटर पर यात्रियों की लंबी कतारें लग जाती हैं, खासकर पीक अवर्स में। ऑपरेटरों और यात्रियों के बीच बहस तक की नौबत आ जाती है।

खुल्ले सिक्कों की बढ़ी अचानक मांग

मई-जून 2025 में एआइसीटीएसएल (AICTSL) ने आईबस के किराए में औसतन 5% की बढ़ोतरी की थी। अब 1.5 किमी की दूरी का किराया 5 से बढ़कर 11 रुपये और 7.5 किमी की दूरी का किराया 21 रुपये हो गया है। इन अंकों की वजह से अब खुल्ले सिक्कों की मांग अचानक बढ़ गई है।

अक्सर यात्री 10 या 20 रुपये का नोट देते हैं, लेकिन काउंटर पर खुल्ले नहीं होने की वजह से या तो पूरा पैसा काट लिया जाता है या यात्री को टिकट ही नहीं मिलता। कई यात्रियों का कहना है कि उन्हें मजबूरी में रोज 1 से 4 रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है।

यात्रियों को झेलनी पड़ रही परेशानी

बाजार में एक और दो रुपये के सिक्के अब पहले की तुलना में कम चलते हैं। ऐसे में रोजमर्रा के यात्री परेशान हो रहे हैं। आम लोग सवाल कर रहे हैं कि किराया तय करते समय व्यवहारिक चुनौतियों को क्यों नहीं समझा गया?

Digital Payment की सुविधा नहीं

देशभर में सरकार जहां डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दे रही है, वहीं इंदौर की आईबस सेवा अब भी सिर्फ नकद लेनदेन पर निर्भर है। यूपीआई, क्यूआर कोड या अन्य डिजिटल भुगतान विकल्प यहां उपलब्ध नहीं हैं। इससे यात्रियों को बार-बार खुल्ले पैसों की दिक्कत उठानी पड़ रही है।

प्रशासन ने क्या कहा?

AICTSL की पीआरओ माला सिंह ठाकुर के अनुसार, ‘हर साल 5% किराया बढ़ता है और उसी के तहत ये नई दरें तय की गई हैं। ऑपरेटरों को खुल्ले पैसे की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। रोजाना 10,000 रुपये के सिक्के काउंटरों तक भेजे जा रहे हैं।’ उन्होंने यह भी बताया कि जल्द ही यूपीआई आधारित भुगतान प्रणाली शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

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