जबलपुर। यूनिवर्सिटी हॉस्टल मैस की रसोई में घूम रहे थे कॉकरोच और बिल्ली; खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में खुली पोल, महज 7 हजार का जुर्माना लगाकर प्रशासन ने पल्ला झाड़ा। एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के छात्रावास (हॉस्टल) में रह रहे छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। छात्रों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जब खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने हॉस्टल मैस की रसोई का औचक निरीक्षण किया, तो वहां गंदगी, भारी अव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा मानकों (Food Safety Standards) की धज्जियां उड़ती मिलीं।
यूनिवर्सिटी हॉस्टल मैस की रसोई में घूम रहे थे कॉकरोच और बिल्ली; खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में खुली पोल, महज 7 हजार का जुर्माना लगाकर प्रशासन ने पल्ला झाड़ा
हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य से जुड़े इतने संवेदनशील मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने मैस संचालक पर महज 7,000 रुपये का मामूली जुर्माना लगाकर अपनी कार्रवाई को सीमित कर दिया है, जिससे अब प्रशासन की भूमिका पर भी कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लाखों का बजट, पर खाने के नाम पर मिल रहा ‘नरक’
विश्वविद्यालय प्रशासन ने हॉस्टल मैस संचालन का ठेका ‘दुर्गेश सर्विस’ नामक एजेंसी को दे रखा है, जिसके कर्मचारी छात्रावास परिसर के भीतर ही भोजन तैयार करते हैं। छात्रों ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि हॉस्टल में भोजन व्यवस्था के नाम पर प्रति विद्यार्थी, प्रतिदिन लगभग 154 रुपये वसूले जाते हैं। इस हिसाब से प्रतिदिन करीब पौने तीन लाख रुपये भोजन व्यवस्था पर खर्च होते हैं। भारी-भरकम राशि देने के बावजूद छात्रों को न तो गुणवत्तापूर्ण (Quality) भोजन मिल पा रहा है और न ही खाने के लिए स्वच्छ वातावरण।
जांच में खुली पोल: खिड़कियां टूटी, घूम रहे थे आवारा जानवर
विद्यार्थियों का आरोप है कि मैस में लंबे समय से अधपका खाना और खराब सब्जियां परोसी जा रही थीं। जब खाद्य सुरक्षा अधिकारी माधुरी मिश्रा के नेतृत्व में टीम जांच के लिए रसोई में पहुंची, तो वहां का नजारा बेहद खौफनाक था:
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कीड़े और जानवर: भोजन तैयार करने वाले मुख्य क्षेत्र में कॉकरोच रेंग रहे थे और आवारा बिल्ली घूमती पाई गई।
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साफ-सफाई की कमी: जिस जगह खाना बन रहा था, वहां हाइजीन का नामोनिशान नहीं था।
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टूटी खिड़कियां: रसोई की खिड़कियों के पल्ले टूटे हुए थे, जिससे बाहरी और आवारा जानवरों के भीतर आने का खतरा हर वक्त बना रहता था।
मामला दबाने का आरोप, कुलसचिव बोले- ‘रख रहे हैं नजर’
छात्रों का सीधा आरोप है कि इतनी बड़ी कमियां मिलने के बावजूद ठेकेदार के खिलाफ कोई ठोस या दंडात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। केवल छोटा सा जुर्माना लगाकर मामले को रफा-दफा करने और दबाने की कोशिश की जा रही है।
इस संबंध में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. प्रवीण त्रिपाठी ने सफाई देते हुए कहा कि ठेकेदार को कड़ी चेतावनी के साथ गुणवत्तायुक्त भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालय स्तर पर भोजन की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जाती है। हालांकि, छात्रों ने कुलसचिव के दावे को खारिज करते हुए कहा कि यदि नियमित निगरानी वास्तव में प्रभावी होती, तो रसोई में कॉकरोच और आवारा जानवरों की मौजूदगी जैसी नौबत ही नहीं आती।
सैंपल रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा अधिकारी माधुरी मिश्रा ने बताया कि कैंटीन संचालक को व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार के कड़े निर्देश (Improvement Notice) जारी किए गए हैं। इसके साथ ही रसोई से खाद्य सामग्री के विभिन्न सैंपल (नमूने) लिए गए हैं, जिन्हें लैब टेस्ट के लिए भेजा जा रहा है। जांच के नतीजों के आधार पर ठेकेदार के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आगे की सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। यूनिवर्सिटी हॉस्टल मैस की रसोई में घूम रहे थे कॉकरोच और बिल्ली; खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में खुली पोल, महज 7 हजार का जुर्माना लगाकर प्रशासन ने पल्ला झाड़ा

