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चंद्रमा के 4.4 अरब साल पुराने रहस्य से उठा पर्दा: भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी खोज, चंद्रयान-4 को मिलेगा फायदा

चंद्रमा के 4.4 अरब साल पुराने रहस्य से उठा पर्दा: भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी खोज, चंद्रयान-4 को मिलेगा फायदा

चंद्रमा के 4.4 अरब साल पुराने रहस्य से उठा पर्दा: भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी खोज, चंद्रयान-4 को मिलेगा फायदा।चंद्रमा की आंतरिक संरचना से जुड़े अरबों साल पुराने रहस्य का खुलासा भारतीय वैज्ञानिकों ने कर दिया है। यह अहम शोध भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर और भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है, जो भारत के आगामी चंद्रयान-4 मिशन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चंद्रमा के 4.4 अरब साल पुराने रहस्य से उठा पर्दा: भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी खोज, चंद्रयान-4 को मिलेगा फायदा

 क्या है नई खोज?

वैज्ञानिकों ने ‘इल्मेनाइट-बेयरिंग क्यूमुलेट्स (IBC)’ नामक दुर्लभ चट्टानों का अध्ययन किया। ये चट्टानें करीब 4.3 से 4.4 अरब साल पहले तब बनी थीं, जब चंद्रमा पिघले हुए मैग्मा के महासागर से ढका हुआ था।

जैसे-जैसे यह मैग्मा ठंडा हुआ, भारी खनिज चंद्रमा की गहराई में चले गए, जो आज भी उसके शुरुआती इतिहास की जानकारी देते हैं।

 लैब में बनाया ‘मिनी चंद्रमा’

वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में चंद्रमा जैसी परिस्थितियां तैयार कीं—

  • दबाव: 3 गीगापास्कल तक
  • तापमान: 1500°C से अधिक

प्रोफेसर सुजय घोष की टीम ने पाया कि ये चट्टानें पिघलकर चंद्रमा के मैंटल के साथ मिलती हैं और टाइटेनियम युक्त बेसाल्ट बनाती हैं, जो चंद्रमा की सतह पर मौजूद है।

 चंद्रयान-4 के लिए क्यों अहम?

भारत का भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन चंद्रयान-4 मिशन चंद्रमा से नमूने लाने की तैयारी में है। यह शोध उन नमूनों की सही पहचान और विश्लेषण में मदद करेगा।

  • टाइटेनियम युक्त क्षेत्रों की पहचान आसान होगी
  • चंद्रमा के विकास को बेहतर समझा जा सकेगा

 मैग्मा का जटिल व्यवहार

शोध में सामने आया कि:

  • उच्च तापमान पर मैग्मा सीधे बेसाल्ट बनाता है
  • कम तापमान पर यह जटिल प्रक्रिया से गुजरता है
  • कुछ मैग्मा सतह पर ज्वालामुखी बनाता है, जबकि कुछ वापस अंदर चला जाता है (मेंटल ओवरटर्न)

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