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CBSE का बड़ा फैसला: कक्षा 9वीं से 3 भाषाएं पढ़ना अब अनिवार्य; 10वीं में तीसरी भाषा की नहीं होगी बोर्ड परीक्षा, जानें नए नियम

CBSE का बड़ा फैसला: कक्षा 9वीं से 3 भाषाएं पढ़ना अब अनिवार्य; 10वीं में तीसरी भाषा की नहीं होगी बोर्ड परीक्षा, जानें नए नियम!  केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक बहुत बड़ा और दूरगामी बदलाव किया है। सीबीएसई ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9वीं और 10वीं की भाषा शिक्षा प्रणाली (Language Education System) को पूरी तरह संशोधित कर दिया है। 15 मई 2026 को जारी एक आधिकारिक परिपत्र (Circular) में बोर्ड ने साफ किया है कि यह नया नियम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF-SE) 2023 के तहत लागू किया जा रहा है। नए नियमों के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना पूरी तरह अनिवार्य (Compulsory) होगा।

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CBSE का बड़ा फैसला: कक्षा 9वीं से 3 भाषाएं पढ़ना अब अनिवार्य; 10वीं में तीसरी भाषा की नहीं होगी बोर्ड परीक्षा, जानें नए नियम

क्या है 3-भाषा फॉर्मूला? समझिए इसके मुख्य नियम

सीबीएसई द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस नए भाषाई ढांचे को तीन श्रेणियों ($R1, R2, R3$) में बांटा गया है:

  • दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य: छात्र जो भी तीन भाषाएं चुनेंगे, उनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी अनिवार्य हैं।

  • विदेशी भाषा (Foreign Language) पर नियम: यदि कोई छात्र फ्रेंच, जर्मन या स्पैनिश जैसी विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है, तो वह इसे केवल तीसरी भाषा ($R3$) के रूप में ही चुन सकता है (बशर्ते पहली दो भाषाएं भारतीय हों)। या फिर, वह इसे एक अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में रख सकता है।

  • स्कूलों को आजादी: देश भर के स्कूलों को सीबीएसई द्वारा सूचीबद्ध भाषाओं में से अपनी सुविधानुसार विषयों का चयन करने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है।

कक्षा 10वीं के छात्रों को बड़ी राहत: नहीं होगी बोर्ड परीक्षा

सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 9वीं में शुरू होने वाली इस तीसरी भाषा ($R3$) को लेकर छात्रों पर बोर्ड परीक्षा का मानसिक दबाव नहीं बनाया जाएगा:

  • स्कूल स्तर पर मूल्यांकन: कक्षा 10वीं में तीसरी भाषा ($R3$) की कोई मुख्य बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। इसका पूरा मूल्यांकन (Assessment) स्कूल स्तर पर आंतरिक परीक्षा के जरिए ही होगा।

  • सर्टिफिकेट में दर्ज होंगे अंक: छात्र का प्रदर्शन उनके अंतिम बोर्ड सर्टिफिकेट में दर्ज जरूर किया जाएगा, लेकिन इसके कारण किसी भी छात्र को कक्षा 10वीं की मुख्य बोर्ड परीक्षा देने से रोका नहीं जाएगा।

  • सैंपल पेपर: स्कूलों की तैयारी के लिए बोर्ड जल्द ही $R3$ भाषा के सैंपल पेपर और आंतरिक मूल्यांकन के दिशा-निर्देश जारी करेगा।

शिक्षकों की कमी और किताबों का संकट कैसे होगा दूर? CBSE की गाइडलाइंस

अचानक लागू हो रहे इस नियम के कारण स्कूलों के सामने आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों को लेकर सीबीएसई ने पहले ही समाधान पेश कर दिए हैं:

चुनौती सीबीएसई का समाधान
किताबों की अनुपलब्धता जब तक $R3$ की नई पाठ्यपुस्तकें नहीं आतीं, तब तक छात्र कक्षा 6 की एनसीईआरटी (2026-27 संस्करण) की किताबों से पढ़ेंगे। साथ ही कहानियों और कविताओं का सहारा लिया जाएगा।
भाषा शिक्षकों की कमी स्कूल अस्थाई तौर पर अन्य विषयों के शिक्षकों की मदद ले सकते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन क्लासेस और साझा शिक्षण (Shared Learning) की व्यवस्था भी अपनाई जा सकती है।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (CWSN) RPwD अधिनियम 2016 के तहत दिव्यांग बच्चों को जरूरत पड़ने पर दूसरी या तीसरी भाषा के अध्ययन से आवश्यक छूट प्रदान की जाएगी।

महत्वपूर्ण डेडलाइन (Timeline)

सीबीएसई से संबद्ध सभी स्कूलों को 30 जून 2028 तक अपने ‘ओएसिस (OASIS) पोर्टल’ पर $R3$ विषय की पूरी जानकारी अनिवार्य रूप से अपडेट करनी होगी। बोर्ड ने सभी प्राचार्यों को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द शिक्षकों के प्रशिक्षण (Training) और अभिभावकों की काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू करें ताकि 1 जुलाई 2026 से इसे सुचारू रूप से जमीन पर उतारा जा सके। अधिक जानकारी के लिए छात्र ‘CBSE Academic’ की ऑफिशियल वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

Usha Pamnani

20 वर्षों से डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता में देश-विदेश, फ़िल्म, खेल सहित सामाजिक खबरों की एक्सपर्ट, वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में वरिष्ठ जिला प्रतिनिधि