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वियतनाम में नाव हादसा: 15 भारतीय पर्यटकों की मौत; चश्मदीद ने सुनाई रोंगटे खड़े कर देने वाली आपबीती

वियतनाम में नाव हादसा: 15 भारतीय पर्यटकों की मौत; चश्मदीद ने सुनाई रोंगटे खड़े कर देने वाली आपबीती

वियतनाम में नाव हादसा: 15 भारतीय पर्यटकों की मौत; चश्मदीद ने सुनाई रोंगटे खड़े कर देने वाली आपबीती

चेन्नई: वियतनाम के प्रसिद्ध फू क्वोक द्वीप (Phu Quoc Island) के पास एक बेहद दर्दनाक और भीषण नाव हादसा सामने आया है। होन मे रुत नगोआई क्षेत्र के निकट 32 भारतीय पर्यटकों और चार स्थानीय चालक दल (क्रू मेंबर्स) को ले जा रही एक बंद स्पीडबोट समुद्र में पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में 15 भारतीय पर्यटकों की मौत हो गई है।

राहत की बात यह रही कि 16 लोगों को सुरक्षित बचाकर इलाज के बाद भारत वापस भेज दिया गया है, जबकि एक घायल पर्यटक अभी भी फू क्वोक के अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है। इस हादसे में सुरक्षित बचे तमिलनाडु के निर्मल कुमार ने चेन्नई लौटने के बाद उस खौफनाक मंजर की दास्तां बयां की।

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कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा? (आंखों देखा हाल)

तमिलनाडु के दिंडीगुल जिले के पलानी निवासी निर्मल कुमार ने बताया कि वे अपने दोस्तों के साथ 8 जुलाई को वियतनाम घूमने गए थे। 11 जुलाई को यात्रा के आखिरी दिन वे सभी लोग एक बंद स्पीडबोट से एक आइलैंड से दूसरे आइलैंड की तरफ जा रहे थे।

  • एक लहर और सब तबाह: सफर के दौरान अचानक समुद्र में एक बेहद ऊंची और तेज लहर आई और सीधे उनकी नाव से टकराई।

  • बिगड़ा संतुलन: लहर टकराते ही नाव एक तरफ झुक गई। खुद को संभालने के चक्कर में बाईं तरफ बैठे सभी यात्री दाईं तरफ गिर पड़े, जिससे बोट का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया और वह पानी में पलट गई।

 बंद बोट बनी ‘काल का कमरा’, लाइफ जैकेट के बाद भी नहीं बची जान

निर्मल कुमार के अनुसार, नाव पलटने के तुरंत बाद बोट के चालक और गाइड ने पानी में छलांग लगा दी। उन्हें देखकर निर्मल और करीब 20 अन्य यात्री भी तुरंत पानी में कूद गए, जिसके कारण उनकी जान बच सकी। लेकिन बोट के पिछले हिस्से में बैठे लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला।

“नाव पूरी तरह से बंद (कवर्ड) थी। लगभग 15 लोग उसके पिछले हिस्से के अंदर ही फंस गए। उन सभी ने लाइफ जैकेट पहन रखी थी, लेकिन नाव के उल्टे होकर उनके ऊपर आ जाने के कारण वे बाहर नहीं निकल पाए और दम घुटने से उनकी मौत हो गई।”

– निर्मल कुमार (हादसे में सुरक्षित बचे पर्यटक)

इस हादसे में निर्मल कुमार ने अपने बचपन के दोस्त मुरुगा प्रभु को भी हमेशा के लिए खो दिया। उन्होंने कहा कि वे अपने दोस्त का शव बरामद होने और औपचारिकताएं पूरी होने तक वियतनाम में ही डटे रहे।वियतनाम में नाव हादसा: 15 भारतीय पर्यटकों की मौत; चश्मदीद ने सुनाई रोंगटे खड़े कर देने वाली आपबीती

 क्या और जानें बचाई जा सकती थीं?

रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर निर्मल ने बताया कि हादसे के करीब 10 मिनट के भीतर ही बचाव दल मौके पर पहुंच गया था। पानी की सतह पर तैर रहे लोगों को तो तुरंत निकाल लिया गया, लेकिन उलटी हुई नाव के नीचे फंसे लोगों को बाहर निकालने में 20 से 30 मिनट का समय लग गया।

उनके ग्रुप में शामिल एक डॉक्टर का मानना था कि यदि घटनास्थल पर तत्काल फर्स्ट-एड (प्राथमिक चिकित्सा) और जरूरी जीवन रक्षक दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था होती, तो शायद 4 से 5 लोगों की जान और बचाई जा सकती थी। इस शिकायत को पीड़ित वियतनाम सरकार के समक्ष भी उठा रहे हैं।

 मृतकों में अधिकांश तमिलनाडु के, शव पहुंचे भारत

इस भीषण हादसे का शिकार हुए 15 मृतकों में से 10 लोग तमिलनाडु, 3 आंध्र प्रदेश और 2 केरल के रहने वाले थे (मृतकों में दो महिलाएं भी शामिल हैं)। तमिलनाडु के मृतकों का जिलावार ब्यौरा इस प्रकार है:

जिला मृतकों की संख्या
चेन्नई 04
तिरुचिरापल्ली 03
सलेम 01
इरोड 01
तिरुप्पुर 01

शवों की ससम्मान वापसी:

सभी मृतकों के पार्थिव शरीर 13 जुलाई की रात करीब 9:30 बजे विशेष विमान से मुंबई पहुंच चुके हैं। आज (मंगलवार) सुबह इन्हें घरेलू उड़ानों से चेन्नई और कोयंबटूर लाया जाएगा। तमिलनाडु राज्य सरकार ने शवों को सम्मानपूर्वक उनके गृह जिलों और परिजनों तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस व अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं।

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