PoK में मुनीर की फौज का खूनी तांडव- 12 आरक्षित सीटों के खिलाफ संग्राम, गोलीबारी में 8 और मौतों का दावा
PoK में मुनीर की फौज का खूनी तांडव- 12 आरक्षित सीटों के खिलाफ संग्राम, गोलीबारी में 8 और मौतों का दावा
PoK में मुनीर की फौज का खूनी तांडव- 12 आरक्षित सीटों के खिलाफ संग्राम, गोलीबारी में 8 और मौतों का दावा
मुजफ्फराबाद/इस्लामाबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हालात पूरी तरह बेकाबू और बारूद के ढेर पर बैठे नजर आ रहे हैं। पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की शह पर सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों पर कहर बनकर टूट रहे हैं। हक और बुनियादी अधिकारों की आवाज उठाने वाले नागरिकों पर सीधी गोलियां बरसाई जा रही हैं, जिसमें ताजा कार्रवाई के दौरान 8 लोगों की मौत का दावा किया जा रहा है। वहीं, इन अत्याचारों के खिलाफ आज मुजफ्फराबाद में एक ऐतिहासिक और विशाल जनमार्च (कूच) का आयोजन किया जा रहा है, जिससे इस्लामाबाद की सरकार थर्रा उठी है।
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रावलकोट में अंधाधुंध फायरिंग, मुजफ्फराबाद कूच रोकने के लिए बरती बर्बरता
चुनावी व्यवस्था के विरोध में उतरे नागरिकों को रोकने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं:
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बस स्टैंड पर खूनी झड़प: बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मुजफ्फराबाद कूच के लिए एकत्र हुए थे। उन्हें रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने रावलकोट बस स्टैंड के आसपास घेराबंदी की।
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आंसू गैस और सीधी गोलियां: प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए न केवल आंसू गैस के गोले दागे गए, बल्कि सीधी फायरिंग भी की गई। स्थानीय दावों के मुताबिक, रावलकोट और सुधनोती के बीच हुई इस गोलीबारी में 8 प्रदर्शनकारियों की मौके पर ही मौत हो गई और दर्जनों गंभीर रूप से घायल हैं।
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महिलाओं ने संभाला मोर्चा: इस दमनकारी कार्रवाई के बावजूद सरकार के खिलाफ हो रहे इस प्रदर्शन में महिलाओं की भी बेहद बड़ी संख्या शामिल है।
आखिर क्या है विवाद? इन 12 रिजर्व सीटों को लेकर क्यों भड़का है PoK?
दरअसल, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले कई हफ्तों से जारी इस महा-आंदोलन की मुख्य जड़ वहां की दोषपूर्ण चुनावी व्यवस्था है:
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कठपुतली सरकार का खेल: PoK विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें से 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित (Reserved) हैं, जो PoK में रहते ही नहीं हैं, बल्कि वे पाकिस्तान के अन्य मुख्य शहरों जैसे लाहौर, कराची और रावलपिंडी में बस चुके हैं।
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इस्लामाबाद का कब्जा नामंजूर: आंदोलनकारियों का सीधा आरोप है कि इन 12 बाहरी सीटों के दम पर इस्लामाबाद (पाकिस्तान सरकार) हर बार PoK में अपनी एक ‘कठपुतली सरकार’ थोप देती है। स्थानीय जनता इस व्यवस्था में तुरंत बदलाव की मांग कर रही है।
36 दिनों से जारी है संग्राम, 80 से ज्यादा मौतों का दावा, 27 जुलाई को चुनाव
PoK में आगामी 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव होने तय हैं, लेकिन उससे पहले पूरा सूबा सुलग रहा है:
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80 से अधिक मौतें: सड़कों पर उतरे संगठनों का दावा है कि पिछले 36 दिनों से जारी इस आंदोलन में अब तक 80 से अधिक प्रदर्शनकारियों की जान जा चुकी है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार की सख्त सेंसरशिप के कारण इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना मुश्किल है।
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डिजिटल ब्लैकआउट: पूरे क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप्प कर दी गई हैं और मोबाइल नेटवर्क बंद हैं, ताकि मुनीर की फौज के जुल्मों की तस्वीरें दुनिया के सामने न आ सकें। सैकड़ों स्थानीय नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेलों में ठूंस दिया गया है। PoK में मुनीर की फौज का खूनी तांडव- 12 आरक्षित सीटों के खिलाफ संग्राम, गोलीबारी में 8 और मौतों का दावा
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जनता का कहना है कि जब वे बिजली, आटा और राशन जैसी बुनियादी चीजें मांगते हैं, तो पाकिस्तान की हुकूमत उन्हें बदले में गोलियां देती है।
-भारत ने जताया कड़ा विरोध, अत्याचार रोकने की अपील
पाकिस्तानी सेना द्वारा PoK के नागरिकों पर किए जा रहे इस अमानवीय और बर्बर अत्याचार का भारत ने भी कड़ा विरोध किया है। भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की इस क्रूरता को बेनकाब करते हुए PoK के निर्दोष लोगों पर हो रहे जुल्मों को तुरंत बंद करने की सख्त अपील की है।
— यशभारत डॉट कॉम








