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इजरायल, अमेरिका और ईरान युद्ध के बीच शुरू हुई गैस सिलेंडर की कालाबाजारी, शहर में भी शुरू हो गई गैस की किल्लत, मनमाने दामों पर उपलब्ध होने लगी गैस

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कटनी(YASHBHARAT.COM)। इजरायल, अमेरिका और ईरान युद्ध के बीच गैस सिलेंडर को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म हो गया है। लोग ब्लैक में सिलेंडर खरीदकर रख रहे हैं। उधर सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इस तरह की अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं कुछ लोग अभी से आपदा में अवसर तलाश रहे हैं। बहरहाल अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर के साथ शहर में भी एलपीजी की किल्लत बढ़ती जा रही है। गैस सिलेंडर एजेंसियों के बाहर लम्बी लाइनें लगना शुरू हो गई हैं। इसके अलावा घरेलू गैस सिलेंडर की कालाबाजारी भी होने लगी है। कुछ लोग घरेलू गैस सिलेंडर के अभी से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। वहीं कॉमर्शियल सिलेंडर भी ब्लैक में बिकने लगा है। इतना ही नहीं कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई पर रोक से कुछ होटलों और रेस्टोरेंट्स में इंडक्शन पर खाना बनाना शुरू कर दिया है। सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम को लागू किया है लेकिन कालाबाजारियों पर इसका असर नहीं पड़ा है। इस खेल में प्राइवेट गैस एजेंसी संचालक, कर्मचारी और दलाल भी शामिल हैं। इसके अलावा गैस की अवैध रिफिलिंग करने वाले भी मौके का फायदा उठा रहे हैं। कुल मिलाकर गैस सिलेंडर की किल्लत होने से इसकी कालाबाजारी बढ़ गई है। 940 रुपए का गैस सिलेंडर ब्लैक में बेचा जा रहा है और जरूरत मंद लोगों से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। वहीं कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कालाबाजारी भी शुरू हो गई है तथा इसके दाम भी निर्धारित कीमत से अधिक वसूले जा रहे हैं। देश में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत के बीच इसके दाम भी आसमान छू रहे हैं। शहर की कुछ एजेंसियों में दिन-दिन भर लाइन में खड़े रहने पर भी लोगों को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। लोगों का दावा है कि इन सबके बावजूद 940 रुपए वाला सिलेंडर 1500 रुपए देने पर तुरंत मिल रहा है। कॉमर्शियल सिलेंडर भी 3500 रुपए में आसानी से उपलब्ध है। घरेलू सिलेंडरों के लिए भी बुकिंग में समस्या आ रही है। जंग से पहले जहां घरेलू सिलेंडर घरों में डिलीवर होता था। अब हालात ये हैं कि लोग एजेंसियों के सामने सिलेंडर लेकर लाइनों में खड़े हैं। फिर भी उन्हें गैस नहीं मिल रही। घरेलू सिलेंडरों की डिलीवरी पहले जो 1-2 दिन में हो जाती थी, अब एक हफ्ते तक इंतजार करना पड़ रहा है। गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लगी हैं।
संकट से निपटने सरकार के कदम भी हवा में
उधर दूसरी तरह सरकार के उठाए गए ये पांच कदमों में से राष्ट्रीय स्तर के कदम में भले ही अमल किया जा रहा हो लेकिन जो कदम एजेंसी स्तर के हैं वो अभी से हवा में उडऩे लगे हैं तथा गैस एजेंसी संचालक, कर्मचारी और दलाल सरकार के इन कदमों को हवा में उड़ाते हुए अभी से आपदा में अवसर की तलाश में जुट गए हैं। जिला प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में घरेलू गैस सिलेंडर और कामर्शियल गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और अधिक बढ़ सकती है। सरकार ने स्थिति से निपटने जो पांच कदम उठाए हैं। उन पर एक नजर…..
1-हाईलेवल कमेटी बनाई-: संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक हाईलेवल कमेटी बनाई है जो सप्लाई की समीक्षा करेगी।
2-एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू-: गैस की सप्लाई को कंट्रोल करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 लागू कर दिया है।
3-25 दिन बाद होगी एलपीजी बुकिंग-: घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में बदलाव किया है। उपभोक्ता एक सिलेंडर डिलीवर होने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक कर सकेंगे।
4- ओटीपी और बायोमेट्रिक अनिवार्य-: गैस की जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी एजेंट ओटीपी या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का सख्ती से इस्तेमाल कर रहे हैं।
5-एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश-: सरकार ने सभी ऑयल रिफाइनरीज को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया था। सूत्रों का कहना है कि अब उत्पादन 10 प्रतिशत बढ़ गया है।
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