मध्यप्रदेश

गुना में सिंधिया के दौरे से बीजेपी विधायक पन्नालाल शाक्य ने बनाई दूरी, सोशल मीडिया पोस्ट के बाद अंदरूनी कलह की चर्चाएं तेज

गुना में सियासी खींचतान: केंद्रीय मंत्री सिंधिया के तीन दिवसीय दौरे से क्षेत्रीय विधायक ने बनाई दूरी, अंतर्कलह की चर्चाएं तेज

गुना में सिंधिया के दौरे से बीजेपी विधायक पन्नालाल शाक्य ने बनाई दूरी, सोशल मीडिया पोस्ट के बाद अंदरूनी कलह की चर्चाएं तेज

गुना। केंद्रीय दूरसंचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के तीन दिवसीय गुना दौरे के बीच क्षेत्र में एक बड़ी सियासी हलचल शुरू हो गई है। सिंधिया के तमाम कार्यक्रमों से स्थानीय भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य की रहस्यमयी दूरी ने सियासी गलियारों में अंदरूनी कलह और बगावत की चर्चाओं को हवा दे दी है। राजनीति के जानकार इसे पिछले दिनों विधायक द्वारा सिंधिया समर्थक मंत्रियों पर साधे गए निशाने से जोड़कर देख रहे हैं।गुना में सिंधिया के दौरे से बीजेपी विधायक पन्नालाल शाक्य ने बनाई दूरी, सोशल मीडिया पोस्ट के बाद अंदरूनी कलह की चर्चाएं तेज

सिंधिया के कार्यक्रम से गायब, ‘मन की बात’ की तस्वीरें कीं पोस्ट

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया 27 जून से अपने तीन दिवसीय दौरे पर गुना पहुंचे थे। इस दौरान उनके कई सार्वजनिक और संगठनात्मक कार्यक्रम हुए, लेकिन क्षेत्रीय विधायक पन्नालाल शाक्य किसी भी मंच पर नजर नहीं आए।

हैरानी की बात यह रही कि रविवार को जब सिंधिया गुना में ही मौजूद थे, तब विधायक शाक्य ने अपने गुना स्थित कार्यालय में बैठकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’ सुनी और इसकी तस्वीरें बकायदा सोशल मीडिया पर पोस्ट कीं। इसके बावजूद वे सिंधिया के किसी कार्यक्रम में शामिल होने नहीं पहुंचे, जिससे गुटबाजी की खबरों को बल मिला।

विधायक की सफाई: ‘भोपाल में पार्टी की बैठक में हूँ’

इस पूरे मामले को लेकर जब सियासी बाजार गर्म हुआ, तो देर शाम विधायक पन्नालाल शाक्य ने अपनी अनुपस्थिति पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि वह संगठन के काम से और पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिए भोपाल आए हुए हैं, इसलिए वे गुना के कार्यक्रमों में दिखाई नहीं दिए।

बगावत या पुरानी कड़वाहट?

भले ही विधायक ने भोपाल बैठक का हवाला दिया हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे इतनी आसानी से नहीं देख रहे हैं। दरअसल, पिछले दिनों विधायक शाक्य ने सिंधिया समर्थक मंत्रियों पर खुलकर निशाना साधा था। ऐसे में सिंधिया के तीन दिवसीय दौरे से उनकी यह दूरी बीजेपी के भीतर गुटबाजी और खींचतान की ओर साफ इशारा कर रही है। अब देखना यह होगा कि सिंधिया खेमे और मूल भाजपाइयों के बीच की यह कड़वाहट आने वाले दिनों में क्या मोड़ लेती है।

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