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बिहार विधान परिषद चुनाव: शिक्षक सीटों पर भारी उलटफेर, 30 साल बाद ढहा BJP का पटना किला, नवल किशोर यादव हारे

बिहार विधान परिषद चुनाव: शिक्षक सीटों पर भारी उलटफेर, 30 साल बाद ढहा BJP का पटना किला, नवल किशोर यादव हारे

बिहार विधान परिषद चुनाव: शिक्षक सीटों पर भारी उलटफेर, 30 साल बाद ढहा BJP का पटना किला, नवल किशोर यादव हारे

बिहार विधान परिषद चुनाव: शिक्षक सीटों पर भारी उलटफेर, 30 साल बाद ढहा BJP का पटना किला, नवल किशोर यादव हारे

पटना: बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव के तहत चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों ने राज्य के सियासी गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। इस चुनाव में शिक्षकों ने बड़ा उलटफेर करते हुए सभी चारों सिटिंग विधान पार्षदों को शिकस्त दे दी है।

सबसे बड़ा झटका भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लगा है, जहाँ पटना सीट से लगातार 30 वर्षों (5 बार) से जीतते आ रहे कद्दावर नेता नवल किशोर यादव चुनाव हार गए हैं। उच्च सदन में इस उलटफेर के बाद नए राजनीतिक समीकरण बनना तय माना जा रहा है।

पटना शिक्षक सीट: 30 साल बाद हारी भाजपा, RJD के डॉ. संजीव की ऐतिहासिक जीत

पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र पर पिछले तीन दशकों से नवल किशोर यादव का एकछत्र दबदबा था। केंद्र और राज्य में एनडीए (NDA) सरकार होने के बावजूद शिक्षकों का रुख बदलाव की ओर रहा।

चारों सीटों का जनादेश: किसी एक दल पर नहीं दिखा भरोसा

शिक्षक मतदाताओं ने इस चुनाव में किसी एक राजनीतिक दल को एकतरफा समर्थन न देकर मिला-जुला जनादेश दिया है। यही वजह है कि चार सीटों में से भाजपा, राजद, जन सुराज और निर्दलीय के खाते में 1-1 सीट गई है:

  1. पटना शिक्षक सीट: राजद (RJD) के डॉ. संजीव कुमार विजयी रहे।

  2. तिरहुत शिक्षक सीट: भाजपा (BJP) के नरेंद्र प्रसाद सिंह ने 600 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।

  3. सारण शिक्षक सीट: भाजपा के बागी और निर्दलीय प्रत्याशी राहुल राज ने 1,815 वोटों से बाजी मारी।

  4. दरभंगा शिक्षक सीट: प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी सुरेश प्रसाद राय ने जीत हासिल कर अपना खाता खोला।

उच्च सदन में बदलेंगे राजनीतिक समीकरण

30 साल बाद पटना शिक्षक सीट का भाजपा के हाथ से निकलना और जन सुराज का खाता खुलना यह संकेत देता है कि राज्य के शिक्षक वर्ग में अपनी मांगों और स्थानीय मुद्दों को लेकर असंतोष था। चारों निवर्तमान (सिटिंग) MLCs का हार जाना यह साफ करता है कि मतदाताओं ने नए चेहरों पर भरोसा जताया है, जिससे बिहार विधान परिषद के भीतर अब नए सिरे से राजनीतिक गठजोड़ देखने को मिलेंगे।

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