जियो आईपीओ पर बड़ा अपडेट: ‘ऑफर फॉर सेल’ नहीं अब आएगा ‘फ्रेश इश्यू’; मुकेश अंबानी ने छोटे निवेशकों के लिए लिया बड़ा फैसला, जानें जुलाई तक क्यों टली लिस्टिंग। भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) के आईपीओ का इंतजार कर रहे निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है। रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) ने जियो की लिस्टिंग के तरीके में आमूलचूल बदलाव करने का फैसला किया है। अब यह आईपीओ ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) के बजाय पूरी तरह से ‘फ्रेश इश्यू’ पर आधारित हो सकता है।
जियो आईपीओ पर बड़ा अपडेट: ‘ऑफर फॉर सेल’ नहीं अब आएगा ‘फ्रेश इश्यू’; मुकेश अंबानी ने छोटे निवेशकों के लिए लिया बड़ा फैसला, जानें जुलाई तक क्यों टली लिस्टिंग
OFS प्लान क्यों हुआ रद्द?
पहले योजना थी कि मौजूदा 14 निवेशक अपनी 8-8.5% हिस्सेदारी बेचेंगे, लेकिन कीमत (Valuation) को लेकर प्रमोटर्स और विदेशी निवेशकों के बीच मतभेद हो गए।
- निवेशकों की मांग: ग्लोबल टेक कंपनियां और पीई फंड्स चाहते थे कि आईपीओ ऊंचे प्राइस बैंड पर आए ताकि उन्हें अधिक मुनाफा मिले।
- मुकेश अंबानी का स्टैंड: रिलायंस का मानना है कि बहुत ऊंची कीमत पर लिस्टिंग से छोटे निवेशकों (Retail Investors) को नुकसान हो सकता है। अंबानी चाहते हैं कि लिस्टिंग के बाद शेयरों में बढ़त की गुंजाइश रहे।
- नतीजा: अब फ्रेश इश्यू आएगा, जिससे जुटाई गई राशि सीधे कंपनी के पास जाएगी। जो निवेशक बाहर निकलना चाहते हैं, वे लिस्टिंग के बाद ओपन मार्केट में शेयर बेच सकेंगे।
कहां खर्च होगा पैसा और क्या होगा असर?
- कर्ज मुक्ति: अनुमान है कि जुटाए गए फंड में से लगभग ₹25,000 करोड़ का इस्तेमाल कंपनी का कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा।
- तकनीकी विस्तार: बाकी रकम 5G विस्तार, एआई (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर, डीप-टेक और सैटेलाइट कनेक्टिविटी जैसे भविष्य के प्रोजेक्ट्स में लगाई जाएगी।
- हिस्सेदारी: फ्रेश इश्यू के कारण रिलायंस की मौजूदा 67% हिस्सेदारी में थोड़ी कमी (Dilution) आएगी, लेकिन कंपनी के खजाने में भारी कैश आएगा।
डेडलाइन में बदलाव: जुलाई तक आ सकता है IPO
सूत्रों के अनुसार, रणनीति में इस बदलाव के कारण ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जमा करने में थोड़ी देरी हो सकती है। उम्मीद है कि अगले 15 दिनों में सेबी के पास दस्तावेज जमा कर दिए जाएंगे, जिससे लिस्टिंग जुलाई 2026 तक जा सकती है।
2020 की वो ऐतिहासिक डील
याद दिला दें कि 2020 में जियो ने गूगल, मेटा (फेसबुक), और सऊदी अरब के पीआईएफ (PIF) जैसे 13 बड़े निवेशकों से ₹1.5 लाख करोड़ से ज्यादा जुटाए थे। तब से कंपनी ने डिजिटल सर्विसेज और 5G के क्षेत्र में अपनी बादशाहत कायम की है।

