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मनमाड–इंदौर रेल परियोजना में आई बड़ी तेजी: महाराष्ट्र और MP की 349 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू; जानें आपके जिले में कितनी जमीन होगी अधिग्रहित

मनमाड–इंदौर रेल परियोजना में आई बड़ी तेजी: महाराष्ट्र और MP की 349 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू; जानें आपके जिले में कितनी जमीन होगी अधिग्रहित

मनमाड–इंदौर रेल परियोजना में आई बड़ी तेजी: महाराष्ट्र और MP की 349 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू; जानें आपके जिले में कितनी जमीन होगी अधिग्रहित

बड़वानी: महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश को आपस में जोड़ने वाली 309 किलोमीटर लंबी बहुप्रतीक्षित मनमाड–इंदौर नई ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना को लेकर एक बड़ी और महत्वपूर्ण प्रगति सामने आई है. इस महत्वाकांक्षी रेल प्रोजेक्ट के मार्ग में आने वाली वन भूमि (Forest Land) के क्लीयरेंस और हस्तांतरण की प्रक्रिया अब विभागीय स्तर पर काफी तेज हो गई है. इसे इस पूरी परियोजना के धरातल पर उतरने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है.

 किस राज्य और जिले में कितनी वन भूमि की होगी आवश्यकता?

इस बड़ी रेल लाइन के निर्माण के लिए दोनों राज्यों के वन क्षेत्रों से होकर पटरी बिछाई जानी है, जिसके लिए कुल 349.7890 हेक्टेयर वन भूमि की आवश्यकता चिन्हित की गई है. दोनों राज्यों और उनके प्रभावित जिलों का विस्तृत ब्यौरा इस प्रकार है: मनमाड–इंदौर रेल परियोजना में आई बड़ी तेजी: महाराष्ट्र और MP की 349 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू; जानें आपके जिले में कितनी जमीन होगी अधिग्रहित

 मध्य प्रदेश (कुल आवश्यकता: 207.3023 हेक्टेयर)

एमपी के मालवा-निमाड़ अंचल के चार प्रमुख जिलों से यह रेल लाइन गुजरेगी:

  • धार जिला: 76.4503 हेक्टेयर
  • बड़वानी जिला: 65.2110 हेक्टेयर
  • खरगोन जिला: 31.0807 हेक्टेयर
  • इंदौर जिला: 14.6680 हेक्टेयर

महाराष्ट्र (कुल आवश्यकता: 142.4867 हेक्टेयर)

महाराष्ट्र के दो जिलों की वन भूमि इस परियोजना के दायरे में आएगी:

  • धुले जिला: 128.6620 हेक्टेयर
  • नासिक जिला: 13.8247 हेक्टेयर

 लाखों लोगों की बरसों पुरानी मांग होगी पूरी

इस परियोजना को लेकर क्षेत्र के लोगों में लंबे समय से उत्साह और उम्मीदें बनी हुई हैं।

मनमाड–इंदौर रेल संघर्ष समिति के प्रमुख मनोज मराठे का बयान:

“यह रेल परियोजना निमाड़, मालवा और उत्तर महाराष्ट्र के लाखों लोगों की वर्षों पुरानी मांग है. वन भूमि से संबंधित आवश्यक विवरणों और प्रस्तावों पर प्रशासनिक स्तर पर तेजी से हो रही कार्रवाई इस बात का साफ संकेत है कि यह प्रोजेक्ट अब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर हकीकत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.”

क्या होगा इस नई रेल लाइन का फायदा?

मनमाड–इंदौर रेल संघर्ष समिति के अनुसार, इस परियोजना के पूर्ण होने पर कई बड़े क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेंगे:

  1. सीधा रेल संपर्क: इस रेल मार्ग के पूरा होने के बाद इंदौर, धार, बड़वानी, खरगोन, धुले, नासिक और मनमाड़ सहित पूरे क्षेत्र के लोगों को सीधा रेल संपर्क (Direct Rail Connectivity) मिल जाएगा.

  2. सफर होगा आसान और छोटा: यात्रियों को कम दूरी तय करनी होगी, जिससे बेहद तेज और सुविधाजनक सफर का विकल्प मिलेगा.

  3. आर्थिक तरक्की को रफ्तार: यह रेल लाइन मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच आर्थिक गतिविधियों को नई गति देगी. इससे क्षेत्र में कृषि, उद्योग, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे.

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जल्द काम शुरू करने की मांग

संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार, रेल मंत्रालय, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय सहित दोनों राज्यों की सरकारों से अपील की है कि वन भूमि स्वीकृति सहित सभी शेष औपचारिकताओं को जल्द से जल्द पूरा कर धरातल पर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए. समिति ने भरोसा जताया कि वन भूमि हस्तांतरण पूरा होते ही वर्षों से प्रतीक्षित इस नई ब्रॉडगेज रेल लाइन का सपना शीघ्र ही साकार हो जाएगा.

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