सतना/कटनी। मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी है। प्रस्तावित पुनर्गठन में विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के जिलों की संगठनात्मक व्यवस्था नए सिरे से तय की जाएगी। इसके तहत सतना और मैहर को मिलाकर सतना विभाग बनाए जाने का प्रस्ताव है, जिसे रीवा संभाग में रखा जाएगा। वहीं, कटनी को नया विभाग बनाने की योजना है, जिसमें दमोह जिले को भी शामिल किया जाएगा। पन्ना को सतना विभाग से अलग कर छतरपुर विभाग में जोड़ने का प्रस्ताव भी इस पूरी कवायद का अहम हिस्सा है।
प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर संघ के महाकौशल प्रांत में जिलों और विभागों के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा बदल जाएगा। संगठन का उद्देश्य बड़े भौगोलिक क्षेत्र में कामकाज को अधिक व्यवस्थित करना, स्थानीय इकाइयों के साथ समन्वय बढ़ाना और अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारियां स्पष्ट करना बताया जा रहा है।
RSS का संगठनात्मक पुनर्गठन क्यों हो रहा है?
महाकौशल प्रांत में 34 जिलों का संगठनात्मक दायरा होने के कारण मौजूदा व्यवस्था में जिम्मेदारियों का प्रभावी संचालन चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, जिलों को तीन संभागीय संरचनाओं—जबलपुर, रीवा और सागर—में व्यवस्थित किया जाएगा। इनके अंतर्गत विभागों का पुनर्वितरण किया जाएगा, ताकि संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी और स्थानीय स्तर पर संपर्क को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
इस व्यवस्था में प्रांत स्तर से लेकर तहसील स्तर तक जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण करने पर जोर है। हालांकि, प्रस्तावित ढांचे और इसके लागू होने की अंतिम स्थिति की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही बदलावों को अंतिम माना जा सकेगा।
सतना-मैहर को मिलाकर बनेगा सतना विभाग
विंध्य क्षेत्र के संगठनात्मक समीकरण में सतना और मैहर की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है। प्रस्तावित व्यवस्था में दोनों जिलों को मिलाकर एक सतना विभाग बनाया जाएगा। इसे रीवा संभाग के अंतर्गत रखने की योजना है।
इस बदलाव से सतना और मैहर की संगठनात्मक गतिविधियों का संचालन एक ही विभागीय इकाई के माध्यम से किए जाने का रास्ता तैयार होगा। प्रस्तावित रीवा संभाग में रीवा, सतना, सिंगरौली और शहडोल विभाग शामिल किए जाने की योजना है। इससे विंध्य क्षेत्र के प्रमुख जिलों के बीच संभागीय स्तर पर समन्वय की नई व्यवस्था बन सकती है।
पन्ना को छतरपुर विभाग में जोड़ने का प्रस्ताव
पुनर्गठन में पन्ना जिले की संगठनात्मक स्थिति भी बदलने की योजना है। फिलहाल प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार पन्ना को सतना विभाग से अलग कर छतरपुर विभाग में शामिल किया जाएगा।
इस बदलाव से बुंदेलखंड क्षेत्र के जिलों के संगठनात्मक संयोजन में भी परिवर्तन होगा। हालांकि, इस प्रस्ताव का अंतिम स्वरूप बैठक में होने वाली चर्चा और निर्णयों पर निर्भर करेगा।
कटनी बनेगा नया विभाग, दमोह भी होगा शामिल
कटनी के लिहाज से प्रस्तावित पुनर्गठन सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक है। योजना के तहत कटनी को अलग विभाग का दर्जा देने और उसमें दमोह जिले को शामिल करने का प्रस्ताव है। कटनी को सागर संभाग के अंतर्गत रखा जाएगा।
प्रस्तावित सागर संभाग में सागर, छतरपुर, कटनी और टीकमगढ़ विभाग शामिल होंगे। वहीं, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों को मिलाकर टीकमगढ़ विभाग बनाने की योजना है।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो कटनी और दमोह के संगठनात्मक संचालन के लिए अलग विभागीय व्यवस्था तैयार होगी। इससे दोनों जिलों की गतिविधियों के समन्वय और जिम्मेदारियों के निर्धारण में बदलाव आएगा।
जबलपुर, रीवा और सागर संभागों में बंटेंगे 34 जिले
प्रस्तावित संगठनात्मक ढांचे में महाकौशल प्रांत के 34 जिलों को तीन संभागों के अंतर्गत व्यवस्थित करने की योजना है।
- जबलपुर संभाग: जबलपुर, मंडला, सिवनी और छिंदवाड़ा विभाग।
- रीवा संभाग: रीवा, सतना, सिंगरौली और शहडोल विभाग।
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सागर संभाग: सागर, छतरपुर, कटनी और टीकमगढ़ विभाग।
इस प्रस्ताव के तहत विभागों और जिलों का पुनर्वितरण कर संगठनात्मक जिम्मेदारियों को अधिक स्पष्ट बनाने की कोशिश की जा रही है। अंतिम सूची और प्रशासनिक स्वरूप की पुष्टि संबंधित संगठनात्मक निर्णय के बाद ही होगी।
प्रांत प्रचारक से तहसील स्तर तक तय होंगी जिम्मेदारियां
प्रस्तावित पुनर्गठन में केवल जिलों और विभागों की सीमाएं बदलने की योजना नहीं है, बल्कि जिम्मेदारियों के ढांचे को भी अधिक व्यवस्थित करने पर जोर है। इसके तहत क्षेत्र प्रचारक के नीचे राज्य प्रचारक और सह राज्य प्रचारक, संभाग प्रचारक, विभाग प्रचारक, जिला प्रचारक, तहसील प्रचारक और विस्तारक जैसे स्तरों पर दायित्व निर्धारित किए जाने का प्रस्ताव है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य संगठन के विभिन्न स्तरों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, स्थानीय इकाइयों से नियमित संपर्क बनाए रखना और गतिविधियों की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना है।
जनवरी 2027 में कटनी में प्रस्तावित बैठक पर नजर
नई प्रांत रचना और संगठनात्मक व्यवस्था को अंतिम रूप देने के लिए कटनी में 16 से 18 जनवरी 2027 तक बैठक प्रस्तावित बताई जा रही है। पहले यह बैठक नवंबर में आयोजित किए जाने की चर्चा थी, लेकिन अब इसे जनवरी तक आगे बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है।
इस बैठक में प्रस्तावित संगठनात्मक ढांचे पर चर्चा और आगे की दिशा तय किए जाने की संभावना है। हालांकि, बैठक की तारीख, एजेंडे और नई व्यवस्था लागू होने के संबंध में आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
कुल मिलाकर, प्रस्तावित पुनर्गठन से सतना, मैहर, कटनी, दमोह और पन्ना सहित कई जिलों का संगठनात्मक समीकरण बदल सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जनवरी में प्रस्तावित बैठक के बाद इन बदलावों को किस स्वरूप में अंतिम मंजूरी मिलती है।

