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देश में चीनी के दामों में बड़ा उछाल: महाराष्ट्र में कीमत ₹5,560/क्विंटल पार; 10 साल बाद फिर चीनी आयात करने की तैयारी में सरकार

देश में चीनी के दामों में बड़ा उछाल: महाराष्ट्र में कीमत ₹5,560/क्विंटल पार; 10 साल बाद फिर चीनी आयात करने की तैयारी में सरकार

भोपाल: आगामी त्योहारी सीजन से ठीक पहले देश भर में चीनी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। महाराष्ट्र के बाजारों में चीनी की एक्स-मिल कीमत (मिल से निकलने की दर) बढ़कर ₹5,400 से ₹5,560 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। मार्च 2026 से ही चीनी के दामों में शुरू हुई यह तेजी अब आम उपभोक्ताओं के बजट पर असर डालने लगी है। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सरकार करीब 10 साल बाद दोबारा विदेशों से चीनी का आयात करने की योजना बना रही है।

आखिर क्यों आई चीनी की किल्लत?

खाद्य एवं चीनी उद्योग के विशेषज्ञों के अनुसार, चीनी महंगी होने के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण जिम्मेदार हैं:

  • उत्पादन से अधिक खपत: 2025-26 के मौजूदा पेराई सीजन में देश के भीतर चीनी की कुल खपत इसके कुल उत्पादन से अधिक रही, जिससे चीनी मिलों के पास उपलब्ध कैरी-ओवर स्टॉक लगातार कम होता गया।

  • शुरुआती निर्यात का असर: सरकार ने सीजन की शुरुआत में उत्पादन के अनुमानों के आधार पर करीब 20 लाख टन निर्यात की मंजूरी दी थी, जिसमें से 8 लाख टन चीनी देश से बाहर भेजी जा चुकी थी।

  • स्टॉक में भारी कमी: इथेनॉल उत्पादन (Ethanol Blending) में इस्तेमाल हुई चीनी को घटाकर इस सीजन देश में कुल उपलब्धता 3.26 करोड़ टन (2.79 करोड़ टन उत्पादन + 47 लाख टन पुराना स्टॉक) रही। करीब 2.8 करोड़ टन की घरेलू खपत और 8 लाख टन निर्यात के बाद बचा हुआ स्टॉक मात्र 35 से 39 लाख टन रह गया है, जबकि देश में सुरक्षित स्थिति के लिए कम से कम 60 लाख टन (3 महीने की खपत) का स्टॉक होना जरूरी माना जाता है।

 10 लाख टन कच्ची चीनी आयात की तैयारी

चीनी की घरेलू कमी और त्योहारी सीजन में बढ़ने वाली मांग को देखते हुए सरकार करीब 10 लाख टन कच्ची चीनी (Raw Sugar) आयात करने की तैयारी में है। भारत ने इससे पहले 2016-17 सीजन में चीनी का आयात किया था।

  • ग्लोबल मार्केट पर असर: भारत द्वारा आयात की खबरों के आते ही न्यूयॉर्क में कच्ची चीनी की अंतरराष्ट्रीय कीमत 14 महीने के उच्चतम स्तर यानी 17.47 सेंट प्रति पाउंड पर पहुंच गई है।

क्या आयात से सस्ती होगी चीनी?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आयातित चीनी बाजार में आने के बाद भी कीमतों में कोई भारी गिरावट देखने को नहीं मिलेगी।

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