रायपुर | 29 अप्रैल, 2026: शिक्षा विभाग में बड़ा ‘डिजिटल’ धमाका: आधार लिंकिंग से स्कूलों में घटे 10 लाख बच्चे, करोड़ों की बचत-करोड़ों की किताबें बचीं, प्रदेश के सरकारी स्कूलों में ‘यूडाइस’ (UDISE) सिस्टम में आधार एंट्री अनिवार्य होते ही शिक्षा विभाग में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। डिजिटल सत्यापन और आधार लिंकिंग की प्रक्रिया ने स्कूलों में चल रहे फर्जी और डुप्लीकेट नामांकन की पोल खोल दी है।
फर्जी नामांकन का खेल खत्म, 10 लाख विद्यार्थी कम
आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 से 2026 के बीच पहली से 10वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों का जब आधार से मिलान किया गया, तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। सत्यापन के बाद विद्यार्थियों की संख्या में लगभग 10 लाख की भारी गिरावट आई है। यह वे नाम थे जो या तो कागजों पर थे या एक से अधिक स्कूलों में दर्ज थे।
अब 50 लाख कम किताबें छपेंगी
इस डिजिटल छंटनी का सीधा असर सरकारी बजट पर पड़ा है।
- 2024 का आंकड़ा: 53.69 लाख विद्यार्थियों को किताबें बांटी गई थीं।
- 2026 का आंकड़ा: वास्तविक संख्या केवल 43 लाख रह गई है।
- बचत: अब सरकार को पहले के मुकाबले 50 लाख कम किताबें छापनी होंगी, जिससे कागज़ और छपाई के करोड़ों रुपये बचेंगे।
पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आधार अनिवार्य होने से अब केवल उन्हीं विद्यार्थियों को योजनाओं (जैसे यूनिफॉर्म, स्कॉलरशिप और मध्याह्न भोजन) का लाभ मिलेगा जो वास्तव में स्कूल आ रहे हैं। इससे संसाधनों का दुरुपयोग रुकेगा और सही छात्र तक लाभ पहुँचेगा।
बदलाव की एक झलक:
| विवरण | वर्ष 2024 | वर्ष 2026 | अंतर |
| दर्ज विद्यार्थी | 53.69 लाख | 43.00 लाख | ~10.69 लाख (घटे) |
| किताबों की जरूरत | अधिक | 50 लाख कम | भारी बचत |

