मध्यप्रदेश

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: दमोह के गंगा-जमुना स्कूल मामले में FIR रद्द करने से इंकार, याचिकाएं खारिज

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: दमोह के गंगा-जमुना स्कूल मामले में FIR रद्द करने से इंकार, याचिकाएं खारिज

दमोह/जबलपुर। दमोह स्थित गंगा-जमुना हायर सेकेंडरी स्कूल में छात्राओं पर कथित तौर पर अनिवार्य हिजाब थोपने और धार्मिक प्रथाएं लागू कराने के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से आरोपियों को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने मामले में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने से साफ इंकार करते हुए याचिकाएं खारिज कर दी हैं।

कोर्ट का रुख: आरोप पहली नजर में निराधार नहीं

न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने स्कूल के पूर्व पदाधिकारियों शैलेन्द्र कुमार जैन, अब्दुल वसीम बारी, शिक्षक अनास अतहर और चपरासी रुस्तम अली की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की:

  • एफआईआर में छात्राओं पर खास ड्रेस कोड और धार्मिक प्रथाएं जबरन लागू कराने का स्पष्ट उल्लेख है।

  • यह सब छात्राओं की इच्छा के खिलाफ, धमकी और दबाव के जरिए कराया गया, इसलिए आरोपों को पहली नजर में बेबुनियाद नहीं माना जा सकता।

  • आरोपों की सच्चाई क्या है, इसका फैसला अब साक्ष्यों (सपूतों) के आधार पर ही होगा।

क्या था पूरा विवाद?

  • पोस्टर से शुरू हुआ बवाल: स्कूल के एक पोस्टर में हिंदू छात्राओं को हिजाब पहने दिखाया गया था, जिसके बाद सरकार ने जांच के निर्देश दिए थे।

  • कलेक्टर की जांच: छात्राओं की शिकायतों के बाद कलेक्टर द्वारा गठित जांच कमेटी ने मामले की पड़ताल की।

  • गंभीर आरोप: स्कूल में हिजाब अनिवार्य करने, छात्रों के तिलक लगाने व कलावा बांधने पर रोक लगाने और उर्दू व नमाज अनिवार्य करने जैसे गंभीर आरोप सामने आए।

पुलिस जांच के बाद धारा 295-ए, 120-बी, 506, किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस पहले ही चार्जशीट (आरोपपत्र) दाखिल कर चुकी है।

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