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भोपाल मेट्रो का बड़ा फैसला: घाटा कम करने के लिए फेरों में कटौती; नान-पीक आवर्स में 21 फेरे घटाए

भोपाल मेट्रो का बड़ा फैसला: घाटा कम करने के लिए फेरों में कटौती; नान-पीक आवर्स में 21 फेरे घटाए

भोपाल। राजधानी भोपाल में मेट्रो ट्रेन संचालन पर हो रहे भारी आर्थिक खर्च और सीमित आय के दबाव के बीच मेट्रो प्रबंधन ने एक बड़ा कदम उठाया है। यात्रियों की कम संख्या और बढ़ते वित्तीय घाटे को देखते हुए मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने मेट्रो के फेरों (Trips) में सीधी कटौती कर दी है। प्रबंधन द्वारा 13 सितंबर को जारी संशोधित समय-सारणी (Revised Timetable) के अनुसार, 15 सितंबर से यह व्यवस्था लागू कर दी गई है।

समय-सारणी में संशोधन का गणित

प्रबंधक ने इसे ‘आंशिक संशोधन’ का नाम दिया है, लेकिन नान-पीक आवर्स (कम भीड़ वाले समय) में फेरों की संख्या में उल्लेखनीय कमी की गई है:

  • सोमवार से शनिवार (सामान्य कार्यदिवस): कुल 21 फेरे कम किए गए हैं।

  • रविवार और सार्वजनिक अवकाश: कुल 6 फेरे कम किए गए हैं।

क्यों लिया गया कटौती का निर्णय?

  1. आर्थिक घाटा और सीमित आय: मेट्रो संचालन का रोजाना का मेंटेनेंस और परिचालन खर्च काफी अधिक है, जबकि शुरुआती चरण में उम्मीद के मुताबिक यात्री नहीं मिल रहे हैं।

  2. 15 मिनट की फ्रीक्वेंसी पर असर: पहले दिनभर में 15-15 मिनट के अंतराल (Frequency) पर 62 से 70 फेरे चलाए जा रहे थे। खाली ट्रेनों के दौड़ने से हो रहे नुकसान को रोकने के लिए नान-पीक आवर्स के फेरों को री-शेड्यूल किया गया है। भोपाल मेट्रो का बड़ा फैसला: घाटा कम करने के लिए फेरों में कटौती; नान-पीक आवर्स में 21 फेरे घटाए

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