इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: NEET-MBBS में बुजुर्गों के लिए 1% आरक्षण की याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा-‘नीति तय करना सरकार और विधायिका का काम’
यश भारत (डिजिटल डेस्क) | कानूनी डेस्क (इलाहाबाद): इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NEET के जरिए MBBS और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए योग्य वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) को 1% आरक्षण या विशेष कोटा देने की मांग वाली याचिका पर अहम फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने अशोक बहार की स्पेशल अपील का निपटारा करते हुए एकल पीठ (सिंगल जज) के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें इस याचिका को खारिज कर दिया गया था।
कोर्ट ने क्या कहा? ‘मौजूदा कानून में कोई प्रावधान नहीं’
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में मेडिकल पाठ्यक्रमों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए किसी भी प्रकार के आरक्षण का कोई कानूनी या संवैधानिक प्रावधान मौजूद नहीं है।
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अधिकारों का अभाव: अदालत ने कहा, “MBBS और अन्य मेडिकल कोर्स में एडमिशन के मामले में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आरक्षण की मांग करने वाला प्रतिवेदन (Representation) किसी भी लागू करने योग्य विधिक अधिकार पर आधारित नहीं है।”
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मैंडेमस रिट संभव नहीं: कोर्ट ने पाया कि जब तक कोई स्पष्ट अधिकार या कानून नहीं है, तब तक अधिकारियों को ऐसा कोई निर्देश जारी करने के लिए ‘रिट ऑफ मैंडेमस’ (Mandamus) जारी नहीं की जा सकती।
क्या था मामला?
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, याची अशोक बहार ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर अधिकारियों को उनके प्रतिवेदन पर विचार करने और NEET के माध्यम से MBBS तथा अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में बुजुर्गों को 1% आरक्षण देने के संबंध में नीतिगत फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की थी।
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सिंगल जज का रुख: इससे पहले एकल पीठ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि मामला विशुद्ध रूप से नीतिगत (Policy Matter) है।
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अपील में चुनौती: एकल पीठ के इसी फैसले को अशोक बहार ने डिवीजन बेंच के सामने इंट्रा-कोर्ट अपील के जरिए चुनौती दी थी।
NTA की दलील: ‘हम सिर्फ परीक्षा कराने वाली एजेंसी हैं’
सुनवाई के दौरान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के वकील ने खंडपीठ के समक्ष स्पष्ट किया कि NTA केवल एक परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्था (Examining Body) है।
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कानून के अनुसार दाखिला: एजेंसी केवल मौजूदा कानूनों, नीतियों और सक्षम प्राधिकारियों द्वारा तय किए गए नियमों के आधार पर ही प्रवेश परीक्षा आयोजित करती है।
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सरकार के अधिकार क्षेत्र में: NTA ने दोहराया कि आरक्षण जैसा कोई भी नया प्रावधान लागू करने का विषय संबंधित विधायिका (Legislature) या सरकार के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
हाईकोर्ट ने अपने अंतिम आदेश में भी यही बात रेखांकित की कि प्रस्तावित आरक्षण पर विचार करना या न करना संबंधित सरकार या विधायिका का काम है।इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: NEET-MBBS में बुजुर्गों के लिए 1% आरक्षण की याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा-‘नीति तय करना सरकार और विधायिका का काम’

