भोपाल । सर्दी का मौसम गुजरने को है, लेकिन देश की महारत्न कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) की भोपाल इकाई अपने 5500 कर्मचारियों को इस बार अब तक स्वेटर नहीं दे सकी है।
कर्मचारियों को संभवत: उस वक्त स्वेटर मिलेंगे, जब गर्मियां शुरू हो चुकी होंगी और उन्हें इसकी कोई जरूरत नहीं होगी। ऑल इंडिया भेल एम्प्लाइ यूनियन (एबु) के पदाधिकारियों से भेल प्रबंधन के अधिकारियों ने साफ कह दिया है कि फिलहाल स्वेटर नहीं दिए जा सकते।
लेटलतीफी का आलम यह है कि अब तक स्वेटर खरीदने की टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
कर्मचारियों का कहना है कि नवंबर-दिसंबर में भेल प्रबंधन को स्वेटर खरीदकर वितरित कर देने थे। इससे ठंड में कर्मचारी स्वेटर का इस्तेमाल कर लेते। एबु के राष्ट्रीय महासचिव रामनारायण गिरी ने बताया कि भेल प्रबंधन घाटे का रोना रोकर कर्मचारियों के खर्चों में कटौती करता आ रहा है।
इस बार अब तक स्वेटर तक नहीं दिए गए, जबकि सर्दी का मौसम निकलने को है। भेल प्रबंधन के अधिकारियों से मिले तो उन्होंने साफ कह दिया कि अभी स्वेटर खरीदने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। हो सकता है कि अप्रैल तक स्वेटर दिए जाएं। कर्मचारी अगले सर्दी के मौसम में इन स्वेटरों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इधर राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के पदाधिकारियों का कहना है कि भेल प्रबंधन ने इस साल कोई भी काम समय पर नहीं किया है। कोरोना के कारण भेल ही नहीं, बाकी उपक्रम भी प्रभावित हुए, लेकिन अब संक्रमण का प्रकोप कम होने के साथ सभी जगह सामान्य कामकाज होने लगा है।
भेल को ऑर्डर भी मिले हैं। उम्मीद है कि इससे भेल 1585 करोड़ स्र्पये के घाटे से उबर भी पाएगा। 31 मार्च तक लक्ष्य प्राप्ति कर भेल को मुनाफा होगा। ऐसे में भेल प्रबंधन की ओर से कर्मचारियों की दी जाने वाली सुविधाओं में कोई कटौती नहीं होनी चाहिए।
कर्मचारियों को सुविधाएं नहीं मिलती हैं तो उनका काम करने का मनोबल गिरता है। वहीं यदि समय पर सुविधाएं मिलें, तो कर्मचारी दोगुने उत्साह से काम करते हैं।

