भारतीय वायु सेना में भावना कंठ ने रचा इतिहास: TACDE से ‘फाइटर कॉम्बैट लीडर’ कोर्स पूरा करने वाली बनीं देश की पहली महिला पायलट
नई दिल्ली: भारतीय वायु सेना (IAF) की महिला अधिकारियों ने एक बार फिर देश का मान बढ़ाया है। स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने ग्वालियर स्थित ‘टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट’ (TACDE) में प्रतिष्ठित ‘फाइटर कॉम्बैट लीडर’ (FCL) कोर्स सफलता पूर्वक पूरा कर इतिहास रच दिया है। वे इस बेहद कठिन और विशिष्ट ट्रेनिंग को पूरा करने वाली देश की पहली महिला फाइटर पायलट बन गई हैं।
इस उपलब्धि को इसलिए भी बहुत बड़ा माना जा रहा है क्योंकि 20 सप्ताह तक चलने वाले इस उच्च-स्तरीय कॉम्बैट प्रोग्राम के लिए पूरी वायु सेना से केवल 1% चुनिंदा फाइटर पायलटों का ही चयन किया जाता है।
‘टॉप गन’ से क्यों होती है इस कोर्स की तुलना?
IAF के इस FCL कोर्स की तुलना अक्सर अमेरिकी नौसेना के विश्व प्रसिद्ध ‘टॉप गन’ (Top Gun) प्रोग्राम से की जाती है।
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कठिन ट्रेनिंग प्रोग्राम: यह 20 हफ्तों तक चलने वाला एक जटिल और शारीरिक-मानसिक रूप से थका देने वाला कोर्स है।
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विशेषज्ञता और रणनीतियाँ: इस कोर्स को पूरा करने वाले पायलट एडवांस्ड एयर कॉम्बैट टैक्टिक्स (हवाई युद्ध की उन्नत रणनीतियों), मिशन प्लानिंग, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, अनमैन्ड सिस्टम्स और नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशन्स के विशेषज्ञ बनते हैं।
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लीडरशिप रोल: ये स्पेशलिस्ट पायलट अग्रिम मोर्चे पर ऑपरेशनल प्लानिंग, हथियारों के प्रभावी इस्तेमाल और एयर कॉम्बैट डॉक्ट्रिन को विकसित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ की प्रमुख उपलब्धियां
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2016 (पहली महिला फाइटर पायलट): जून 2016 में भावना कंठ, अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह के साथ IAF में कमीशन होने वाली भारत की पहली तीन महिला फाइटर पायलटों में शामिल हुईं।
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2019 (डे-टाइम कॉम्बैट क्वालिफिकेशन): मई 2019 में वे MiG-21 बाइसन पर दिन के समय कॉम्बैट मिशन उड़ाने की अनुमति (Daytime Combat Qualification) हासिल करने वाली पहली महिला बनीं।
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सुखोई-30 MKI का संचालन: दिन के कॉम्बैट मिशन में सफलता के बाद उन्होंने वायु सेना के सबसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान Su-30 MKI को भी उड़ाना शुरू किया।
भारतीय सेना में महिलाओं का बढ़ता गौरव
सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का एक और ऐतिहासिक उदाहरण हाल ही में तब देखने को मिला, जब कैप्टन शिवानी सहरावत थल सेनाध्यक्ष (Army Chief) की ‘एड्स-डी-कैंप’ (ADC) नियुक्त होने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं।








