Bengal Election: बंगाल में सियासी भूचाल, हुमायूं कबीर का नया दांव—ओवैसी से गठबंधन, ‘मुस्लिम CM’ का मुद्दा गरमाया। पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। Humayun Kabir के बागी तेवरों ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। तृणमूल कांग्रेस से निलंबित इस विधायक ने नई पार्टी बनाकर ऐसा दांव चला है, जिससे सत्ताधारी दल और विपक्ष दोनों की चिंता बढ़ गई है।
Bengal Election: बंगाल में सियासी भूचाल, हुमायूं कबीर का नया दांव—ओवैसी से गठबंधन, ‘मुस्लिम CM’ का मुद्दा गरमाया
नई पार्टी का गठन, AIMIM से गठबंधन
हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ के गठन का ऐलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने Asaduddin Owaisi की पार्टी All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen के साथ गठबंधन की औपचारिक घोषणा भी कर दी है। इस कदम को बंगाल की राजनीति में नए समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है।
‘मुस्लिम CM’ का मुद्दा उठाया
कबीर ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि आजादी के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में मुस्लिम मुख्यमंत्री या कम से कम डिप्टी सीएम बनने का वक्त आ गया है। उनका कहना है कि राज्य की राजनीति अब नए मोड़ पर है और मुस्लिम समाज अपनी राजनीतिक भागीदारी चाहता है।
ममता बनर्जी पर सीधा हमला
कबीर ने Mamata Banerjee पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने मुस्लिम समुदाय को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी गंभीर होती तो 90-100 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देती, लेकिन केवल 47 को मौका दिया गया।
30% वोट बैंक पर नजर
हुमायूं कबीर का पूरा फोकस राज्य के करीब 30% मुस्लिम वोट बैंक पर है। उनका मानना है कि अगर यह वोट एकजुट हो जाता है, तो बंगाल की सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।
चुनाव में बढ़ेगी टक्कर
कबीर-ओवैसी गठबंधन के ऐलान के बाद अब बंगाल में मुकाबला और दिलचस्प होने की उम्मीद है। इस नए राजनीतिक समीकरण से तृणमूल कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा और अन्य दलों की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है।
