18 ब्लड प्रेशर दवाओं के बैच टेस्ट में फेल, स्वास्थ्य विशेषज्ञों में चिंता

18 ब्लड प्रेशर दवाओं के बैच टेस्ट में फेल, स्वास्थ्य विशेषज्ञों में चिंता

18 ब्लड प्रेशर दवाओं के बैच टेस्ट में फेल, स्वास्थ्य विशेषज्ञों में चिंता, देशभर में ब्लड प्रेशर की दवाओं की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। हाल ही में सीडीएससीओ (CDSCO) की रिपोर्ट में सामने आया कि पिछले महीने कुल 198 दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल हुईं, जिनमें ब्लड प्रेशर की दवाओं का नंबर सबसे अधिक है।

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18 ब्लड प्रेशर दवाओं के बैच टेस्ट में फेल, स्वास्थ्य विशेषज्ञों में चिंता

क्या है समस्या?

विशेषज्ञों के अनुसार, 18 बैच की ब्लड प्रेशर दवाएं डिसॉल्यूशन टेस्ट में फेल पाई गई हैं। यह टेस्ट जांचता है कि दवा शरीर में कितनी तेजी और मात्रा में घुलती है। यदि दवा सही से घुलती नहीं है, तो मरीज को उसका पूरा लाभ नहीं मिलता, यानी ब्लड प्रेशर नियंत्रण में नहीं आता।

साइलेंट फेलियर’ का खतरा

इस तरह की दवाओं को लेने पर भी मरीज को कोई संकेत नहीं मिलता कि दवा काम नहीं कर रही है। इसे साइलेंट फेलियर कहा जा रहा है। लंबे समय तक इस स्थिति में रहने से हार्ट की बीमारी, स्ट्रोक और किडनी की समस्या का खतरा बढ़ सकता है।

भारत में BP की स्थिति

भारत में ब्लड प्रेशर एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है। करोड़ों लोग इससे प्रभावित हैं, लेकिन जीवनशैली, तनाव और खानपान के कारण बहुत कम लोग अपना बीपी सही तरीके से कंट्रोल कर पाते हैं। अब अगर दवाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं की निगरानी और टेस्टिंग को और कड़ा करने की जरूरत है, ताकि मरीजों को सुरक्षित और असरदार इलाज मिल सके। 18 ब्लड प्रेशर दवाओं के बैच टेस्ट में फेल, स्वास्थ्य विशेषज्ञों में चिंता

 

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