FEATUREDव्यापार

‘बैंक AI को दिशा दें, वरना AI बैंकिंग पर हावी हो जाएगा’; FIBAC 2026 में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की बड़ी चेतावनी

‘बैंक AI को दिशा दें, वरना AI बैंकिंग पर हावी हो जाएगा’; FIBAC 2026 में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की बड़ी चेतावनी

मुंबई: देश का बैंकिंग और वित्तीय सेक्टर एक बड़े तकनीकी परिवर्तन के मोड़ पर खड़ा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ एक तकनीकी टूल नहीं रहा, बल्कि यह हमारे रोजमर्रा के वित्तीय फैसलों, लोन प्रक्रिया और बैंक खातों के संचालन को पूरी तरह बदलने वाला है. इसी संदर्भ में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैंकों को सतर्क करते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि उन्हें AI तकनीक के पीछे चलने के बजाय खुद इसकी कमान संभालनी होगी [cite: रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैंकों को चेताया है कि वे AI तकनीक को खुद दिशा दें. अगर बैंक नहीं जगे, तो AI पूरी बैंकिंग पर हावी हो जाएगा।].

मुंबई में आयोजित FIBAC 2026 सम्मेलन को संबोधित करते हुए गवर्नर ने कहा कि अगर बैंक अभी से इसके लिए रणनीतिक रूप से तैयार नहीं हुए, तो AI तकनीक अपने हिसाब से पूरे बैंकिंग सेक्टर को चलाने लगेगी [cite: FIBAC 2026 के हालिया सम्मेलन में बोलते हुए RBI गवर्नर ने एक बहुत ही बुनियादी सवाल उठाया। … अगर बैंक अभी से इसके लिए तैयार नहीं हुए, तो यह तकनीक अपने हिसाब से बैंकिंग सेक्टर को चलाएगी।].

 जोखिम और जिम्मेदारी: पैसेंजर या ड्राइवर?

सम्मेलन के दौरान RBI गवर्नर ने बैंकों के सामने एक बुनियादी सवाल रखा कि वे AI के इस सफर में खुद ‘ड्राइवर’ की भूमिका निभाना चाहते हैं या फिर चुपचाप इसके निर्देशों का पालन करने वाले ‘पैसेंजर’ बनना चाहते हैं [cite: FIBAC 2026 के हालिया सम्मेलन में बोलते हुए RBI गवर्नर ने एक बहुत ही बुनियादी सवाल उठाया। उन्होंने बैंकों से कहा कि उन्हें यह तय करना होगा कि वे AI के सफर को खुद आकार देना चाहते हैं, या फिर चुपचाप इसके निर्देशों का पालन करना चाहते हैं।]:

  • व्यापक बदलाव की जरूरत: आज जब वित्तीय संस्थान रिस्क मैनेजमेंट, कस्टमर सर्विस और इंटरनल ऑपरेशन्स के लिए AI पर निर्भर हो रहे हैं, इसे सिर्फ एक साधारण डिजिटल टूल समझना भूल होगी [cite: आज के समय में जब वित्तीय संस्थान ग्राहकों की सेवा, जोखिम का आकलन करने और अपने आंतरिक कामकाज को सुधारने के लिए तेजी से AI की तरफ भाग रहे हैं, ऐसे में यह चेतावनी बहुत मायने रखती है। गवर्नर ने स्पष्ट किया कि इसे केवल एक और डिजिटल टूल समझने की भूल नहीं करनी चाहिए।].

  • सोचने-समझने की क्षमता: पुरानी तकनीकों ने इंसानी काम की केवल रफ्तार बढ़ाई थी, लेकिन AI के पास इंसान की तरह निर्णय लेने और जटिल कोड लिखने जैसी क्षमताएं हैं [cite: जहां पुरानी तकनीकों ने सिर्फ इंसानी काम की रफ्तार बढ़ाई थी, वहीं AI में इंसान के सोचने-समझने वाले काम खुद करने की क्षमता है। इसका सीधा उदाहरण सॉफ्टवेयर कोडिंग है, जो अब AI की मदद से बहुत आसान हो गया है।].

  • फाइनेंशियल डिसीजन में क्रांति: माना जा रहा है कि वित्तीय फैसले लेने में AI भविष्य में वही बड़ी क्रांति ला सकता है, जो UPI ने डिजिटल पेमेंट्स के क्षेत्र में लाई है.

 भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा AI की नींव

गवर्नर मल्होत्रा ने रेखांकित किया कि भारत में तैयार हुआ विश्वस्तरीय डिजिटल ढांचा ही AI की नई सफलताओं की नींव रखेगा:

  • मजबूत डिजिटल पिलर्स: UPI, डिजीलॉकर, ONDC, यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (ULI) और अकाउंट एग्रीगेटर जैसी सरकारी व नियामक पहलों ने एक ऐसा मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया है, जिस पर बैंक और फिनटेक कंपनियां भविष्य के उन्नत AI ऐप्स विकसित कर सकती हैं [cite: यूपीआई (UPI), आधार, डिजीलॉकर और ओएनडीसी (ONDC) जैसी सरकारी डिजिटल पहलों ने भारत को एक नई पहचान दी है। … गवर्नर मल्होत्रा का मानना है कि यही वह बुनियादी ढांचा है जिस पर निजी कंपनियां और बैंक भविष्य के नए AI एप्लिकेशन तैयार कर सकते हैं।].

बैंकिंग सुधार: 203 मंजूरियां हुईं ऑटोमेट, बेसल-III के लिए बैंक तैयार

बैंकिंग सुधारों और नियमों पर बात करते हुए रिजर्व बैंक ने ग्राहकों की सुविधा और वित्तीय स्थिरता के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी:

  • 203+ मंजूरियां ऑटोमेटेड: रिज़र्व बैंक ने बैंकों के प्रशासनिक कामकाज को तेज करने के लिए 203 से अधिक तरह की मंजूरियों को ऑटोमेट (स्वचालित) कर दिया है, जिससे 99.9% सेवाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी हो रही हैं [cite: रिजर्व बैंक ने बैंकों के कामकाज को आसान बनाने के लिए 203 से ज्यादा तरह की मंजूरियों को स्वचालित (ऑटोमेट) कर दिया है, जिससे 99.9 प्रतिशत सेवाएं तय समय में मिल रही हैं।].

  • बेसल-III (Basel III) नियम: अगले वित्तीय वर्ष की शुरुआत से लागू हो रहे बेसल-III के नए वैश्विक मानकों के लिए भारतीय बैंक पूरी तरह से तैयार हैं.

  • नए दिशा-निर्देश: लोन के रिस्क असेसमेंट, प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग और डिविडेंड वितरण से जुड़े नए संशोधित नियमों को भी अंतिम रूप दे दिया गया है.

Back to top button