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AI से बदल रही बैंकिंग, लेकिन क्यों सिर्फ एक बैंक ही देख पा रहा है फायदा?

AI से बदल रही बैंकिंग, लेकिन क्यों सिर्फ एक बैंक ही देख पा रहा है फायदा?

AI से बदल रही बैंकिंग, लेकिन क्यों सिर्फ एक बैंक ही देख पा रहा है फायदा? आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अन्य उद्योगों के साथ बैंकिंग क्षेत्र में भी व्यापक स्तर पर बदलाव लाने में सक्षम है। एआई एक गेम-चेंजर बन गया है, जो दक्षता, पहुंच और आर्थिक विकास की नई सीमाओं को खोल रहा है। इसके बावजूद वैश्विक स्तर पर हर चार में से सिर्फ एक बैंक ही अपने प्रतिद्वंद्वियों से प्रतिस्पर्धात्मक लाभ हासिल करने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहा है।

AI से बदल रही बैंकिंग, लेकिन क्यों सिर्फ एक बैंक ही देख पा रहा है फायदा?

कंसल्टेंसी फर्म बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) ने एक रिपोर्ट में कहा, बैंकिंग उद्योग 2025 में एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। एआई और जेनरेटिव एआई बैंकिंग उद्योग को मौलिक रूप से बदल रहे हैं। रिपोर्ट में उन बैंकों के बीच बढ़ते अंतर को भी उजागर किया गया है, जो एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं और जो इस मामले में पीछे हैं। एआई का इस्तेमाल नहीं करने वाले बैंकों के न सिर्फ कारोबार और सेवाओं पर असर पड़ रहा है, बल्कि लागत एवं मुनाफा भी प्रभावित हो रहा है। वहीं, एआई को अपनाने वाले बैंक तेजी से आगे बढ़ रहे हैं

रिपोर्ट के मुताबिक, जेनरेटिव और एजेंटिक एआई जैसे टूल ग्राहकों को अपनी सहूलियत एवं फायदे के हिसाब से बैंकों के चयन में मदद कर रहे हैं। इसलिए, एआई संचालित अंडरराइटिंग, रियल-टाइम क्रेडिट जोखिम और इससे जुड़े वित्तीय तंत्र बैंकों के शुल्क आधारित आय को खत्म कर रहे हैं। बैंकों की भूमिका को फिर से परिभाषित कर रहे हैं। AI से बदल रही बैंकिंग, लेकिन क्यों सिर्फ एक बैंक ही देख पा रहा है फायदा?

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