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बछ बारस 2026: संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है यह व्रत, जानें पूजा में गणेश जी की कथा का महत्व और पूरी पौराणिक कहानी

बछ बारस 2026: संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है यह व्रत, जानें पूजा में गणेश जी की कथा का महत्व और पूरी पौराणिक कहानी

भोपाल (यशभारत डॉट कॉम)। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को ‘बछ बारस’ (गोवत्स द्वादशी) का पर्व मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस पूजन में गाय और बछड़े की विशेष रूप से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बछ बारस की कथा के साथ गणेश जी की कहानी सुनने से ही यह व्रत-पूजन पूर्ण और सफल माना जाता है।

क्यों सुनी जाती है गणेश जी की कथा?

शास्त्रों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य माना गया है। किसी भी व्रत या पूजा-अनुष्ठान के अंत में गणेश जी की कहानी सुनने का विशेष महत्व है, जिससे पूजन में हुई किसी भी अनजाने भूल-चूक का निवारण होता है और भक्त को पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है।

बछ बारस पर सुनी जाने वाली गणेश जी की पावन कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में एक मां और बेटी रहते थे। एक दिन गांव के लोग गणेश मेला देखने जा रहे थे, तो बेटी ने भी अपनी मां से मेला जाने की जिद की। मां ने पहले तो भीड़ और चोट लगने के डर से मना किया, लेकिन बेटी के न मानने पर मां ने उसे दो लड्डू और थोड़ा सा पानी देकर विदा किया। मां ने कहा— “बेटी, एक लड्डू गणेश जी को खिलाकर थोड़ा पानी पिला देना और दूसरा लड्डू खुद खाकर बचा हुआ पानी पी लेना।”

लड़की मां की बात मानकर मेले में चली गई। मेला समाप्त होने पर सभी लोग अपने घर लौट आए, लेकिन वह लड़की वहीं गणेश जी की प्रतिमा के पास बैठ गई। वह लगातार गणेश जी से आग्रह करती रही— “गणेश जी, एक लड्डू और पानी आपके लिए है और एक लड्डू-पानी मेरे लिए।”

पूरी रात बीत जाने के बाद भी लड़की वहीं बैठी रही। गणेश जी ने देखा कि अगर उन्होंने भेंट स्वीकार नहीं की, तो यह मासूम लड़की घर नहीं जाएगी और उसकी मां परेशान होगी। तब श्री गणेश एक छोटे बालक का रूप धारण कर प्रकट हुए। उन्होंने लड़की के हाथ से एक लड्डू खाया और पानी पिया।

इसके बाद प्रसन्न होकर गणेश जी ने कहा-“मांगो बेटी, क्या मांगती हो?”

लड़की असमंजस में पड़ गई कि वह अन्न मांगे, धन-दौलत मांगे, अपने लिए सुंदर वर मांगे या बड़ा सा महल। जब वह सोच ही रही थी, तब सर्वज्ञ गणेश जी ने उसका मन पढ़ लिया और मुस्कुराते हुए बोले— “तुम अपने घर जाओ, तुमने मन में जो भी सोचा है, वह सब तुम्हें प्राप्त होगा।”

लड़की जब अपने घर पहुंची, तो मां ने देर से आने का कारण पूछा। बेटी ने मेले की पूरी बात मां को बता दी। देखते ही देखते लड़की के मन में सोची हुई हर इच्छा पूरी हो गई— उनका घर धन-धान्य और सुख-समृद्धि से भर गया।

हे गणेश भगवान! जैसे आपने उस बच्ची और उसकी मां पर अपनी कृपा बरसाई, वैसे ही इस व्रत को करने वाली सभी माताओं और उनकी संतान पर अपनी मेहर बनाए रखना। बोलो गणेश भगवान की जय….

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