Wednesday, April 29, 2026
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Atithi Shikshak नियमित विद्वानों के विकल्प के रूप में अतिथि विद्वानों की भूमिका महत्वपूर्ण फिर भी सरकार की बेरूखी

Atithi Shikshak भारतीय संविधान में शिक्षा को मूल अधिकारों में शामिल किया गया हैं और भारत के भविष्य निर्माण में शिक्षा की भूमिका महत्वपूर्ण हैं। शिक्षा के प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक में शैक्षणिक व्यवस्था के अंतर्गत अलग-अलग नामों से नियमित विद्वानों के विकल्प के रूप में अतिथि विद्वानों की भूमिका महत्वपूर्ण हैं।

मध्यप्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग में शैक्षणिक कार्यभार प्राध्यापक, सह प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक द्वारा किया जाता है जिनकी नियुक्ति लोक सेवा आयोग के द्वारा की जाती है, लेकिन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और शासन के निर्देशों के बावजूद अतिथि विद्वानों और सबसे अंतिम स्तर पर स्ववित्तीय अतिथि विद्वानो को रखा जाता हैं।

वर्तमान में युवा पीढ़ी को व्यवसायिक एवं रोजगार मूलक और स्वरोजगार से प्रेरित शिक्षा की आवश्यकता है, जिसमें स्ववित्तीय अतिथि विद्वान अपनी आधारभूत भूमिका निभाते है, लेकिन मध्यप्रदेश शासन के वर्तमान नियम एवं प्रावधान उन्हे उच्च शिक्षा का पायदान मानने में लगे हुए हैं। स्ववित्तीय अतिथि विद्वानउच्च शिक्षा के सभी मापदण्डो एवं सेवा शर्तो को पूरा करते है जो सहायक प्राध्यापक और अतिथि विद्वानों के समान ही हैं, परन्तु इन सब के बावजूद सभी स्ववित्तीय अतिथि विद्वानो को विसंगति पूर्ण मानदेय में अपना कार्य करना पड़ता है और साथ ही अपने परिवार का जीवन यापन भी इस विभेद पूर्ण स्थिति एवं अन्याय में करना पड़ रहा हैं इसका जिम्मेदार कौन हैं?

स्ववित्तीय पाठ्यक्रमों में विगत 20 वर्षो से लाखो विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। जिनसे प्राप्त शुल्क से महाविद्यालयों की जनभागीदारी मद में लगभग 500 करोड रूपये से अधिक की राशि कोष में है, परन्तु स्ववित्तीय अतिथि विद्वान अपनी आम जरूरतो को पूरा करने में ऐड़ी चोटी को जोर लगा देते है। अब समय आ गया हैं कि प्रदेश में लगभग 7000 हजार से अधिक स्ववित्तीय अतिथि विद्वानों के हित में शासन न्यायपूर्ण निर्णय ले और उनकी सभी वांछित मांगों को पूरा करें।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम