ज्योतिष: कछुए की अंगूठी धारण करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान, जानें किस अंगुली और धातु में पहनना है शुभ

ज्योतिष: कछुए की अंगूठी धारण करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान, जानें किस अंगुली और धातु में पहनना है शुभ

ज्योतिष: कछुए की अंगूठी धारण करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान, जानें किस अंगुली और धातु में पहनना है शुभ

कटनी / भोपाल: सनातन परंपरा और धर्म शास्त्रों में कछुए का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु ने कच्छप (कछुआ) अवतार धारण कर मंदराचल पर्वत को आधार प्रदान किया था। इसी वजह से कछुए को स्थिरता, धैर्य, सुख-समृद्धि और धन का प्रतीक माना जाता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कछुए वाली अंगूठी (Turtle Ring) धारण करने से जीवन में आर्थिक स्थिरता आती है। हालांकि, इसे धारण करने के कुछ बेहद सख्त नियम हैं। यदि इस अंगूठी को सही विधि और दिशा के साथ न पहना जाए, तो यह शुभ फल देने के बजाय नुकसान भी पहुंचा सकती है।

किसे धारण करनी चाहिए यह अंगूठी?

ज्योतिषविदों के अनुसार:

  • जिन जातकों के जीवन में लगातार आर्थिक उतार-चढ़ाव बना रहता है।
  • जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है या हाथ में धन नहीं टिकता।
  • जिनका मन अशांत रहता है और एकाग्रता (Concentration) की कमी महसूस होती है।
  • जो लोग अपने करियर या व्यवसाय में स्थिरता प्राप्त करना चाहते हैं।

किस धातु में और किस अंगुली में पहनें?

  • शुभ धातु: कछुए की अंगूठी मुख्य रूप से चांदी (Silver) में बनवानी चाहिए। चांदी का संबंध चंद्रमा और शुक्र ग्रह से होता है, जिससे मानसिक शांति और धन-वैभव बढ़ता है। कुंडली के अनुसार इसे पंचधातु या अष्टधातु में भी बनवाया जा सकता है।
  • सही अंगुली: इसे हमेशा दाहिने हाथ (Right Hand) की दो अंगुलियों में से किसी एक में पहनना चाहिए:
  • तर्जनी (Index Finger): यह अंगुली देवगुरु बृहस्पति से जुड़ी है, जो ज्ञान देती है।
  • मध्यमा (Middle Finger): यह अंगुली शनिदेव से संबंधित है, जो कर्म और न्याय के कारक हैं।

सबसे महत्वपूर्ण नियम: कछुए के मुख की दिशा

अंगूठी पहनते समय कछुए के मुख की दिशा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है:

  • मुख आपकी ओर हो: कछुए का मुख हमेशा पहनने वाले व्यक्ति की तरफ (अंदर की ओर) होना चाहिए। इससे धन और सकारात्मक ऊर्जा आपकी तरफ आकर्षित होती है।
  • विपरीत दिशा से नुकसान: यदि कछुए का मुख बाहर की तरफ होगा, तो धन का बेवजह व्यय (खर्चा) बढ़ता है।
  • घुमाने से बचें: अंगूठी को बार-बार अंगुली में घुमाना नहीं चाहिए।

धारण करने की विधि और शुभ दिन

  • शुभ दिन: इस अंगूठी को शुक्रवार (मां लक्ष्मी का दिन) या सोमवार (भगवान शिव का दिन) को पहनना सबसे उत्तम माना जाता है। यदि शुक्रवार के दिन पूर्णिमा तिथि पड़े, तो यह अति शुभ संयोग होता है।ज्योतिष: कछुए की अंगूठी धारण करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान, जानें किस अंगुली और धातु में पहनना है शुभ

  • शुद्धिकरण एवं पूजन:

  • नई अंगूठी को गंगाजल से धोकर शुद्ध करें।
  • इसे मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु के श्री चरणों में रखें।
  • धूप-दीप से पूजन करें और ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः तथा ॐ विष्णवे नमः मंत्रों का जाप करें।
  • पूजन के पश्चात ही इसे धारण करें।

 इन बातों का रखें विशेष ध्यान

(यह समाचार लोक मान्यताओं और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। )