मध्यप्रदेश

DEO ऑफिस में बड़ा खेल: प्रमोशन लिस्ट आते ही मंचा बवाल, सीनियरों का हक मार जूनियर्स को उपकृत करने का आरोप

DEO ऑफिस में बड़ा खेल: प्रमोशन लिस्ट आते ही मंचा बवाल, सीनियरों का हक मार जूनियर्स को उपकृत करने का आरोप

DEO ऑफिस में बड़ा खेल: प्रमोशन लिस्ट आते ही मंचा बवाल, सीनियरों का हक मार जूनियर्स को उपकृत करने का आरोप

विशेष संवाददाता। जिला शिक्षा कार्यालय (DEO) अपनी विवादित कार्यप्रणाली और कारनामों को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला लोक सेवकों की पदोन्नति (Promotion) और क्रमोन्नति सूची में वरिष्ठता के नियमों को ताक पर रखने का है। विभाग द्वारा लिपिक संवर्ग (Clerical Cadre) के कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया के तहत मार्च 2026 की स्थिति में गोपनीय चरित्रावली (CR) और अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे गए हैं। लेकिन जैसे ही 37 कर्मचारियों की यह सूची सार्वजनिक हुई, विभाग के भीतर ही बगावत के सुर तेज हो गए हैं और अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

‘पिछले दरवाजे’ से चहेतों को उपकृत करने का खेल!

पदोन्नति सूची सामने आते ही विभाग के कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। पीड़ित कर्मचारियों का सीधा आरोप है कि सालों से ईमानदारी से अपनी सेवाएं दे रहे वरिष्ठ (Senior) कर्मचारियों का हक सरेआम मारा जा रहा है। अधिकारियों द्वारा अपने पसंदीदा और जूनियर (Junior) कर्मचारियों को पिछले दरवाजे से फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में जमकर हेरफेर किया गया है। विभाग के भीतर ही इस पक्षपात को लेकर अंदरूनी बगावत शुरू हो गई है।

आदेश क्रमांक 2081 के तहत 37 नाम तय, उठ रहे सवाल

मिली जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के तहत समय-सीमा में इस पदोन्नति कार्रवाई को पूरा किया जाना है। इसके लिए विभाग द्वारा बाकायदा एक ऑफिशियल आर्डर भी जारी किया गया है:

  • आदेश क्रमांक: स्था.4/पदो./भृत्य-लिपिक/2026/2081
  • तय किए गए नाम: 37 लिपिक (Clerks)

इस आदेश के तहत 37 लिपिकों के नाम तय कर उनकी गोपनीय चरित्रावली मांगी गई है। लेकिन वरिष्ठता सूची (Seniority List) को दरकिनार कर इन नामों को शामिल किए जाने के बाद से ही पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है।DEO ऑफिस में बड़ा खेल: प्रमोशन लिस्ट आते ही मंचा बवाल, सीनियरों का हक मार जूनियर्स को उपकृत करने का आरोप

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कोर्ट की चौखट तक पहुंच सकता है मामला

विभागीय सूत्रों की मानें तो जिन वरिष्ठ कर्मचारियों के नामों को इस लिस्ट से गायब किया गया है, वे अब इस धांधली के खिलाफ लामबंद होने लगे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि इस सूची को निरस्त कर वरिष्ठता के आधार पर दोबारा पारदर्शी लिस्ट नहीं बनाई गई, तो वे इस मामले को लेकर उग्र आंदोलन करेंगे और ‘मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025’ के उल्लंघन की शिकायत लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

अब देखना यह होगा कि इस मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी इस पर क्या सफाई देते हैं या फिर हर बार की तरह इस बार भी मामले को दबाने का प्रयास किया जाएगा।

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