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प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी हरेमाधव सतगुरु पर्व हरिराया सतगुरु सांई ईश्वरशाह साहिब जी के पावन सानिध्य में पूर्ण श्रद्धा भगतिभाव से मनाया गया

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कटनी -हरे माधव सतगुरु पर्व, अर्थात पूरण सतगुरु शरण से समस्त जगत के उद्धार के लिए यथार्थ संदेशों, प्रभुमय वाणियों का प्राप्त होना। सौभाग्यशाली, पुण्यभागी हैं वे आत्माएं जो भजन सिमरन कमाई वाले तत्वदर्शी सतगुरु की मंगलकारी ओट शरण में आकर इन वचनों को आत्मसात कर, अमल में ला आतम उद्धार के मार्ग पर अग्रसर हैं।प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी हरेमाधव सतगुरु पर्व हरिराया सतगुरु सांई ईश्वरशाह साहिब जी के पावन सानिध्य में पूर्ण श्रद्धा भगतिभाव से मनाया गयाहाजिरां हुजूर सतगुरु बाबा ईश्वरशाह साहिब जी द्वारा 12 जनवरी 2025 को सायं बाबा माधवशाह चिकित्सालय प्रांगण में हरे माधव रूहानी बाल संस्कार एवं हरेमाधव यूथ टीम द्वारा आयोजित हरेमाधव क्रीड़ाः निकुंजः (गेम जोन) का शुभारंभ किया गया, जिसका प्रत्येक गेम अध्यात्मिक उपदेश से पूर्ण रहा, इसका उद्देश्य खेल-खेल में बच्चों, बड़ों सभी को आत्मिक ज्ञान से भरना है। इसके पश्चात् सतगुरु साहिबान जी के श्री कर कमलों से हरेमाधव परमार्थ सत्संग समिति के सतगुरु सेवकों के द्वारा आयोजित हरेमाधव स्नेह भोजनम् (फूड केन्टीन) का भी शुभारंभ हुआ।

माधवनगर, कटनी, बाबा माधवशाह चिकित्सालय प्रांगण में ही आयोजित हरे माधव सोझी मेला (हरे माधव यथार्थ गुरुमत पथ) का उद्घाटन 14 जनवरी दोपहर हरिराया सतगुरु बाबा ईश्वरशाह साहिब जी द्वारा किया गया। हमारा मन, पूरण सतगुरु के उपदेशों, अध्यात्म व आत्म उद्धार के मार्गों से दूर करने के लिए उनमें अरूचि, आलस्य का भाव पैदा कर देता है, सतगुरु साहिबान जी मन के इन बहानों को देखते हुए, हरेमाधव सोझी मेला में प्रदर्शनी व झॉकियों के माध्यम से रोचक तरीके से इंसानी जन्म के असल उद्देश्य, आध्यात्मिक विकास, आतम उद्धार के मारग, शाश्वत शान्ति, असल सुख प्राप्ति का भेद प्रदान किया गया। हरेमाधव सोझी मेले में सतगुरु साहिबान जी के दिव्य गूढ़ संदेश एवं धरा जगत पर अनन्त करूणा सुरक्षा संभाल की साखियां सहज, सरल रूप से प्रस्तुत की गई और सतगुरु के उपकारी मेहर कृपा का शुक्राना अर्पित किया।

इस दौरान सतगुरु भगति, सतगुरु दर्शन पाने सतगुरु सेवक पिताम्बर टोपनानी, पूर्व अध्यक्ष कटनी विकास एवं प्राधिकारण प्रदीप मिश्रा, एसडीएम कटनी, महापौर प्रीति सुरी, आर.एस.एस. प्रचारक मोहित कनकने, पार्षद ईश्वर बहरानी, गोविन्द चावला, राजकुमार माखीजा सहित माधवनगर के अनेक सामाजिक एवं धार्मिक कार्यकर्ता एकत्रित हुए और सतगुरु मेहर आशीष पाई। हरेमाधव सोझी मेला में हरेमाधव यथार्थ गुरुपथ की यात्रा वृत्तान्त समझाया गया समझाईश के पश्चात् सभी ने अपना निज अनुभव सभी से सांझा किया एवं हरेमाधव रूहानी बालसंस्कार व यूथ टीम की सराहना की ।

कटनी माधवनगर में आयोजित पावन हरेमाधव सतगुरु पर्व पर अनेक नगरों कस्बों ग्रामों से लाखों श्रद्धालु इस पुनीत पर्व का हिस्सा बनने पधारे। जिनके ठहराव एवं आहार की व्यवस्था हरेमाधव परमार्थ सत्संग समिति माधवनगर कटनी द्वारा की गई।

दिनांक 14 जनवरी 2025 को सायं हरेमाधव सत्संग की शुरुआत हरेमाधव सद्ग्रंथ वाणी अरदास मेरे सतगुरां हम शरण तेरी आए के साथ हुई। जिसमें हाजिरां हुजूर सतगुरु बाबा ईश्वरशाह साहिब जी का शुभागमन ढोल-नगाड़ो एवं खुशी में झूमते-नाचते हरेमाधव- हरेमाधव के जयकारें लगाते श्रद्धालुओं के साथ हुआ। आपजी जब श्रीआसन पर विराजमान हुए तो नन्हें-नन्हें बच्चों ने पावन श्रीचरणों में भाव भरा नमन, चरणवंदना नृत्य प्रस्तुत किया, तत्पश्चात हरेमाधव रूहानी बाल संस्कार एवं हरेमाधव यूथ टीम द्वारा भावपूर्ण एकांकी सतगुरु भवजल तारे साधो प्रस्तुत किया गया।

पात्रों के अभिनय ने पूर्ण रूप से संगतों को एकांकी से जोड़े रखा। इस एकांकी का सारगर्भित भाव यह रहा कि पूरण सतगुरु शिष्यों को पावन शरण में रख उनसे सतगुरु भक्ति, सतगुरु सेवा, अमृत नाम का सिमरन ध्यान करा उनके भारी कर्मों को हर लेते हैं और संसार रूपी भवसागर से तार देते हैं।

आप हरेमाधव प्रभु सतगुरु जी की करुणामय लीलाओं के भंडार के कुछ कण इस एंकाकी के द्वारा भगतों के लिए भक्ति पथ ज्योर्तिमय करने के लिए मंचित किए गए इसके पश्चात् प्रभु सतगुरु जी ने अपने पावन श्री मुख से संगतों को अमृत वचन फरमान किए।
प्रेमी भक्तों ने भी सतगुरु भगति में आनन्द मस्त हो, झूम-नाचकर शाश्वत खुशियाँ मनाई, हरेमाधव भजन रागों सद्ग्रंथ वाणियों और शब्द कीर्तन से सारा आभामण्डल प्रेमामय भक्ति भाव से भर गया एवं मध्यरात्रि धुनि के पश्चात् सभी ने हरेमाधव ब्रम्हभोज (भंडारा प्रसाद) ग्रहण किया।


अगले दिन, 15 जनवरी 2025 को भी प्रातः हरेमाधव वाणी अरदास के साथ हरेमाधव सत्संग प्रारंभ हुआ, हरिराया सतगुरु बाबा ईश्वरशाह साहिब जी का सत्संग पंडाल में शुभागमन भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ, जिसमें सतगुरु बाबाजी पुष्पों से सुसज्जित श्री रथ पर विराजित हो संगतों को पावन दर्शन, मेहर कृपा आशीष कर रहे। शिष्य भगतजन हरेमाधव-हरेमाधव का जयघोष करते, झूमते नाचते-गाते हुए श्रीदर्शन कर रथ को धीरे-धीरे आगे बढ़ाते हुए सत्संग स्थल तक आए।
सत्संग पंडाल में विराजमान होने पर हरेमाधव रूहानी बाल संस्कार के नन्हें बच्चों द्वारा सतगुरु महिमा उस्तत के बोल से भरी श्रीचरण वंदना की गई। तदुपरांत हरेमाधव सत्संग वाचन प्रारंभ हुआ, जिसमें परम महिमा के वचन आए,
“सतगुरु के अंगने में, भगति नामै भर भर समायो” समझाया गया कि हरिराया सतगुरु की पावन सत्संगती मिलना सोभाग्य की बात है हम सभी सोभाग्यशाली है कि हमे सतगुरु सांई ईश्वरशाह साहिब जी की पावन ओट छाया, सत्संगति, न्यारा ऑंगन प्राप्त हैं आप साहिबान जी शिष्यों संगतों अकारण ही अनन्त उपकार करते हुए करुणा कृपा की त्रिवेणी बहाते हैं, प्रीत भाव का पवित्र बल दे जीवात्माओं को उबारते है।
सत्संग वचनों के बाद एल.ई.डी. पर हरेमाधव परम उद्धारी लीला को दर्शाया गया कि परम सिद्ध पुरुख सतगुरु साहिबान जी ने त्रेतायुग से तप समाधि में लीन ऋषि सुमेरू को ऋषिकेश के बियाबान वनों में जाकर शाश्वत मुक्ति का प्रसाद बक्शा। आप साहिब जी की यह विराट लीला देख संगतें बलिहार भाव, उस्तत भाव से भर गईं।

तत्पश्चात सतगुरु जी ने अपने पावन श्री मुख से अमृत वर्षा कर समझाया कि परमात्मा ना आकाशों में ना ही पातालों में रहने वाली ताकत है, वह हर इक प्राणी के अन्तर में ज्योत रूप में समाहित है, जिसे केवल और केवल पूरण सतगुरु की साधसंगत में आकर सतगुरु नाम भक्ति कर ही प्रगट किया जा सकता है।
हरेमाधव सतगुरु पर्व में आई कई प्रेमी संगतों ने अपने अनुभव सांझा किए कि हरिराया सतगुरु बाबा ईश्वरशाह साहिब जी की दया रहमत, अनन्त उपकार, भगति द्वारा उनका जीवन जो पहले मुर्झाया सा था, वह अब खिल उठा है, उनके अनेक दुख सतगुरु कृपा से दूर हुए जीवन दान मिला।
अनेक नगरों से पधारे श्रद्धालुओं ने सतगुरु श्री चरणों में नमन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हुए हरेमाधव ब्रम्हभोज भंडारा प्रसाद से मुख पवित्र किया। आप साहिबान जी निज तन की परवाह न करते हुए 8-9 घंटे लगातार श्री आसन पर विराजमान हो, संगतों-शिष्यों पर प्रेमामय दृष्ट कर निहाल करते रहे।
सत्संग में संगतें भजन रागों शब्द कीर्तन पर श्रद्धा भाव से नचनच कर अपने निर्मल भाव अर्पित करते रहीं
पावन श्री चरणों में समर्पित भाव से माथा टेकते हुए आशीर्वाद प्राप्त कर हरेमाधव ब्रम्हभोज भंडारा प्रसाद से मुख पवित्र किया।

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