इसी बहाने-उगलने के बावजूद कम नहीं होता जहर

देश की राजनीति में इन दिनों जहर जमकर उगलने का सिलसिला जारी है किंतु खास यह नहीं बल्कि यह है कि इतना जहर उगलने के बाद भी यह कम नहीं हो रहा।

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फिलहाल लोक की बारी फिर तंत्र के आगे बेचारी

इसी बहाने(आशीष शुक्‍ला)। लोकतंत्र का महापर्व है, खुशियां बिखरीं हैं। भले ही अब चुनावी उत्सव का नजारा आयोग की बेड़ियां

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सरकारें आएंगी-जाएंगी, मगर यह देश रहना चाहिये, इस देश का लोकतंत्र रहना चाहिये..

इसी बहाने (आशीष शुक्‍ला )। चुनाव की आचार संहिता किसी भी पल लग जायेगी तब माननीयों की वर्तमान की दूरदर्शिता ही

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