अब ऑस्ट्रिया में लागू हुआ ‘बुर्का बैन’ कानून

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वियना। सोमवार से यूरोपीय देश ऑस्ट्रिया में बुर्का बैन कानून लागू हो गया। इस कानून के तहत कोई भी शख्स पूरी तरह अपना चेहरा नहीं ढंक सकेगा।

बुर्का बैन कानून को खासतौर पर रुढ़िवादी मुस्लिम महिलाओं से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि ज्यादातर यही महिलाएं नकाब, हिजाब या बुर्के से अपना शरीर और चेहरा ढंकती है।

ये कानून लागू होने के बाद ऑस्ट्रिया में कोई भी शख्स अस्पताल के बाहर सर्जिकल मास्क नहीं पहन सकेगा। वहीं क्लब के बाहर कोई पार्टी मास्क से चेहरा नहीं ढंक सकेगा। अगर किसी ने इस कानून का उल्लंघन किया तो उसपर 180 डॉलर का जुर्माना लगेगा। वहीं पुलिस को जरुरत पड़ने पर सख्ती के अधिकार भी दिए गए हैं। इसके अलावा देश में आने वाले अप्रवासियों को अब एक कॉन्ट्रै्क्ट साइन करना पड़ेगा और जर्मन भाषा को भी सीखना पड़ेगा।

हालांकि ऑस्ट्रिया में लागू किए गए कानून पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं, क्योंकि यहां रहने वाली मुस्लिम महिलाओं में से काफी कम हैं जो नकाब या बुर्का पहनती हैं। ऐसे में ये महिलाएं उन पार्टियों के निशाने पर आ गईं जो राष्ट्रवादी सोच रखती हैं।

ऑस्ट्रिया में चांसलर क्रिस्चियन कर्न की सरकार ने बुर्का बैन कानून को लागू किया है। इस बारे में सरकार ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि देश में रहने के लिए उसके मूल्यों और कानून का पालन करना सबसे अहम है। ऐसे में ऑस्ट्रिया की बहुसंख्यक आबादी और दूसरे देश से आकर यहां बसे लोग एकसाथ रह सकें, इसके लिए ये कदम जरूरी थी।

हालांकि ऑस्ट्रिया में इसी महीने 15 अक्टूबर को चुनाव हैं,ऐसे में बुर्का बैन कानून के जरिए देश की सियासत गरमा सकती है। खासतौर पर इस कानून लागू करके जनता के बीच अपनी छवि मजबूत करने में जुटी मौजूदा सरकार जरुर इसका फायदा उठाना चाहेगी।

चुुनावी सर्वे भी उन पार्टियों की जीत का दावा कर रहे हैं जो देश में आ रहे शरणार्थियों के विरोध की नीति पर काम कर रहे हैं। ऐसे में सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद सत्ता में ज्यादातर वक्त रही सेंट्रिस्ट सरकार को राष्ट्रवादी पार्टियों से चुनौती मिल सकती है।

ऑस्ट्रिया के अलावा पहले से ही फ्रांस, बेल्जियम में इस तरह का कानून लागू है। वहीं जर्मनी में भी इस तरह के कानून की मांग उठ रही है। खुद जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल भी इसे दोहरा चुकी हैं।

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