प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाओं के चुनाव टले, बैठाए प्रशासक

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भोपाल। प्रदेश में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के चुनाव टल गए हैं। सवा चार हजार से ज्यादा समितियों में से आधी से ज्यादा के संचालक मंडल का कार्यकाल 8 और 13 जनवरी को समाप्त हो गया। इसके चलते समिति के बोर्ड भंग हो गए और यहां प्रशासक बैठा दिए गए हैं। बाकी समितियों का कार्यकाल भी 18 जनवरी को खत्म हो जाएगा। बताया जा रहा है कि सरकार विधानसभा चुनाव तक समितियों के चुनावों को छह-छह माह कर अगले साल तक टाल सकती है। इसको लेकर अंतिम फैसला मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे।

सूत्रों के मुताबिक प्रदेश की लगभग सवा चार हजार सहकारी समितियों में से दो हजार से ज्यादा ने चुनाव कराने के प्रस्ताव निर्वाचन प्राधिकारी को भिजवा दिए थे। निर्वाचन प्राधिकारी कार्यालय ने जिलों से चुनाव कराने के लिए दूसरे विभागों के हर जिले में दस-दस अधिकारियों की सूची मांगी थी, लेकिन चार-पांच जिलों ने ही भिजवाई। वहीं, न तो समितियों के प्रस्तावों का अभी परीक्षण हुआ है और न ही मतदाता सूची को लेकर पूरी तैयारी हो पाई है। निर्वाचन प्राधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने बताया कि करीब छह माह पहले आयुक्त सहकारिता को पत्र लिखकर जिलों में तैयारी करने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों की बैठकें कराने के लिए कहा था। बताया जा रहा है कि जिलों में न तो बैठकें हुई और न ही कोई अन्य तैयारी।

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राजनीतिक नियुक्ति पर फैसला नहीं

सूत्रों का कहना है कि प्रशासक पद पर राजनीतिक नियुक्ति के लिए भी प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग के बीच चर्चा होनी है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री की हरी-झंडी मिलने के बाद ही इस बारे में कोई अंतिम फैसला होगा। उल्लेखनीय है कि सहकारिता विभाग ने प्रशासक के तौर पर राजनीतिक नियुक्ति के लिए विधानसभा के शीतकालीन सत्र में ही सहकारी अधिनियम में संशोधन किया है। इसके तहत संस्था का सदस्य बनने की योग्यता रखने वाले व्यक्ति को प्रशासक बनाया जा सकता है। इसके पहले तक सिर्फ अधिकारी ही प्रशासक बन सकता था।

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कार्यकाल समाप्त होते ही तैनात होते हैं प्रशासक

सहकारी अधिनियम के मुताबिक निर्वाचित संचालक मंडल का कार्यकाल समाप्त होते ही प्रशासक की तैनाती करनी होती है। जिला स्तर पर उप पंजीयक, संभाग स्तर पर संयुक्त पंजीयक और राज्य स्तर की संस्था के लिए पंजीयक के स्तर से प्रशासक की नियुक्ति के आदेश निकालने होते हैं। प्रशासक की तैनाती अधिकतम एक साल के लिए की जा सकती है। इस बीच सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी को चुनाव कराने होते हैं।

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