Murena Crime: मुरैना प्रशासन का संयुक्त दल न मिलावट रोक पा रहा न ही अवैध रेत उत्खनन

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Murena Crime । मिलावट और अवैध रेत उत्खनन के लिए मुरैना जिला देशभर में कुख्यात हो चुका है। मिलावट और अवैध उत्खनन को रोकने के लिए संभाग आयुक्त ने संयुक्त टीम बनाई है। इसके अलावा जिला स्तर पर टास्क फोर्स समिति का गठन किया गया है। इन दोनों ही टीमों ने बीते एक साल में ऐसी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जो मिलावट और रेत माफियाओं में प्रशासन का खौफ पैदा कर पाए।

मप्र सरकार ने करीब डेढ़ साल पहले मिलावट से मुक्ति अभियान शुरू किया था, जिसके तहत डेयरी, चिलर प्लांटों से लेकर खाद्य पदार्थ की दुकानों पर सैंपलिंग व छापे मारने की कार्रवाई हुई। इसी बीच अवैध रेत के वाहनों से लगातार हादसों की घटनाएं होने लगीं। मिलावट और अवैध रेत उत्खनन पर अंकुश लगाने के लिए संभाग आयुक्त आशीष सक्सेना ने करीब एक साल पहले संयुक्त दल बनाया, जिसमें राजस्व, पुलिस, वन विभाग, खनिज विभाग की टीम अवैध रेत पर कार्रवाई के लिए बनाई, इसी तरह राजस्व, पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग का संयुक्त दल मिलावट के खिलाफ कार्रवाई के लिए तैनात किया गया।

बीते एक साल में संयुक्त टीम ने न तो रेत के अवैध उत्खनन पर कोई कार्रवाई की है, न ही मिलावट पर। अवैध रेत की स्थिति तो यह है, कि बारिश से पहले ही रेत माफिया ने चंबल नदी को इस तरह छलनी कर डाला है, कि चंबल किनारे बीहड़ों में अवैध रेत का स्टाक करने के लिए छोटे-छोटे पहाड़ से बना दिए हैं।

दूसरी ओर शहर में रामनगर, बड़ोखर से लेकर वैरियर केएस तिराहा, अंबाह बायपास रोड और नूराबाद में नप तिराहा के पास हर सुबह अवैध रेत की मंडी लगती है। रेत की इन मंडियों में दर्जनों ट्रैक्टर-ट्राली अवैध रेत से भरे खड़े रहते हैं। प्रशासन की संयुक्त टीम बीहड़ों में रखे अवैध रेत तो छोड़िए शहर में रोज सुबह लग रही रेत की मंडियों पर कार्रवाई नहीं कर पा रही। मिलावट व अवैध उत्खनन पर लगाम लगाने के लिए जिला टास्क फोर्स समिति भी गठित हुई है। हर तीन महीने में कलेक्टर-एसपी इस बैठक में मिलावट व अवैध उत्खनन को रोकने की रणनीति बनाते हैं, कार्रवाई के निर्देश देते हैं, लेकिन बीते सवा साल में टास्क फोर्स की टीम ने भी कोई कार्रवाई नहीं की है।

मिलावट : रोज साढ़े तीन लाख लीटर से ज्यादा बन रहा मिलावटी-नकली दूधः

मुरैना जिले में सवा तीन लाख से ज्यादा मवेशी हैं। इन मवेशियों से सर्दी के सीजन में 12 लाख लीटर दूध प्रतिदिन उत्पादन होता है, उस समय भी नकली दूध जिले में बनता है। गर्मी के सीजन में दूध का उत्पादन आठ से साढ़े आठ लाख लीटर रह गया है। ऐसे में नकली व मिलावटी दूध बनाने वाले मिलावट के माफिया सक्रिय हो गए हैं। एक अनुमान के हिसाब से जिले में हर रोज साढ़े तीन लाख लीटर से ज्यादा नकली दूध बन रहा है। इसमें से लगभग डेढ़ लाख लीटर मिलावटी न नकली दूध चिलर प्लांट व टैंकरों के जरिए ग्वालियर के मालनपुर, राजस्थान के धौलपुर व उप्र के आगरा तक जा रहा है।इतना नहीं दो लाख लीटर मिलावटी या नकली दूध से पनीर, मावा जैसे उत्पाद बनाकर ग्वालियर, इंदौर, भोपाल से लेकर दिल्ली तक सप्लाई हो रहा है।

हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद एक भी प्रभावी कार्रवाई नहीं:

मुरैना जिले में मिलावट के बेलगाम कारोबार पर ग्वालियर हाईकोर्ट सख्त नाराजगी जता चुका है। 19 जुलाई को हाईकोर्ट ने मिलावट को लेकर मुरैना कलेक्टर को तलब किया और मिलावट रोकने के लिए सख्त कदम उठाने और मिलावट रोकने के लिए हुई कार्रवाई की पूरी जानकारी कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट की नाराजगी और सख्त आदेशों के 12 दिन बाद भी मुरैना जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने कोई प्रभावी कार्रवाई मिलावट को रोकने नहीं की। इन 12 दिन में अंबाह, पोरसा और मुरैना क्षेत्र में लगभग 10 डेयरी व चिलर प्लांटों पर छापामार कर दूध, पनीर व घी के सैंपल लिए हैं, लेकिन अंबाह, पोरसा से लेकर जौरा, कैलारस के ग्रामीण क्षेत्रों में जहां सबसे ज्यादा मिलावटी व नकली दूध, पनीर बन रहा है, वहां एक भी कार्रवाई नहीं की।

 

  • अवैध रेत पर कार्रवाई के लिए संयुक्त दल बना है, जिला टास्क फोर्स समिति की बैठक भी सभी विभागों को साथ मिलकर कार्रवाई का निर्णय हुआ है। हमारी टीमें अवैध रेत पर लगातार कार्रवाई करती रहती हैं, हां अभी तक संयुक्त दल ने कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की, लेकिन हम जल्द ही बड़ी कार्रवाई की योजना बना रहे हैं।

स्वरूप दीक्षित

डीएफओ वन विभाग, मुरैना

  • मिलावट रोकने और मिलावट पर सख्त कार्रवाई के पूरी खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को लगाया है। हमें जहां से सूचना आती है वहां तत्काल कार्रवाई कर रहे हैं। अवैध उत्खन व मिलावट के खिलाफ संयुक्त टीम बड़ी और प्रभावी कार्रवाई जल्द करेंगे।

बी कार्तिकेयन, कलेक्टर, मुरैना

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