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जनगणना के बारे में कुछ रोचक बातें, 1 जून से शुरू होगी 2021 की जनगणना

नई दिल्ली। मोदी सरकार ने 2021 की जनगणना की तैयारी शुरू कर दी है। इस साल 1 जून से जनगणना की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। गृहमंत्रालय ने इस बारे में उच्च स्तरीय बैठक की, जिसकी अध्यक्षता गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने की।

इनमें डिजाइन तैयार करना, हितधारकों की बैठक और चयनित राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट शामिल है। देश में हर दस साल पर जनगणना की जाती रही है। अंतिम जनगणना 2011 में हुई थी और तब देश की जनसंख्या एक अरब 21 करोड़ 08 लाख 54 हजार 977 बताई गई थी।

सिंह ने असम में राष्ट्रीय नागरिक खाता (एनआरसी) को अपडेट किए जाने की प्रगति, राष्ट्रीय जनसंख्या खाता से जुड़ी गतिविधियां पूरी करने, नागरिक पंजीकरण प्रणाली को बेहतर और सुदृढ़ करने पर भी चर्चा की। असम में एनआरसी को अपडेट किए जाने के सिलसिले में बताया गया कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के मुताबिक 1.9 करोड़ लोगों की एक मसौदा सूची 31 दिसंबर 2017 को प्रकाशित की गई।

इस बार जनगणना के कई मानक बदलेंगे। अधिकारियों का कहना है कि कई मानक वक्त के हिसाब से पुराने हो गए हैं उन्हें हटा दिया जाएगा और पहले शामिल नहीं किए गए मानकों को इस बार जोड़ा जाएगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की दशा का वास्तविक चेहरा समझने के लिए कुछ नए मानकों को भी जनगणना में जोड़ा जाएगा। हाल में कई जानकारों ने कहा था कि कई मोर्चों पर जनगणना या नेशनल सैंपल सर्वे से मिले आंकड़ों से सही तस्वीर सामने नहीं आती है।

इन्हीं आलोचनाओं के मद्देनजर इस बार जनगणना में बड़ा बदलाव करने की तैयारी है। जनगणना प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होने के बाद सरकार इस मसले पर सभी राज्यों और राजनीतिक दलों से भी राय लेगी।उनके सुझाव को इसमें शामिल करने की कोशिश होगी।

जनगणना के बारे में कुछ रोचक बातें

भारत में पहली जनगणना साल 1872 में लार्ड मेयो के कार्यकाल में हुई थी। भारत में नियमित जनगणना की शुरुआत साल 1881 में लार्ड रिपन के कार्यकाल में हुई थी। वहीं, बात अगर स्वतंत्र भारत की पहली जनगणना की करें, तो साल 1951 में आजाद भारत की पहली जनगणना की गई थी।

जनगणना का महाभिवजक वर्ष 1921 है और हर 10 वर्ष में जनगणना की जाती है। जनगणना का लघु विभाजक वर्ष 1951 है। साल 2011 में हुई आखिरी जनगणना देश की 15वीं और आजाद भारत की 7वीं जनगणना है।

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